बैंक आफ इंडिया के कोलकाता स्थित आंचलिक कार्यालय की ओर से विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150वीं वर्षपूर्ति पर राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुरुआत आंचलिक प्रबंधक मनीष कुमार फुलरे के संबोधन से हुआ। विशिष्ट अतिथि वक्ता विजय मोहन बरेजा, महाप्रबंधक ऑयल इंडिया लिमिटेड ने वंदे मातरम् गीत के बारे में विस्तार से समझाया और कहा कि यह मातृभूमि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता एवं सम्मान का भाव जगाती है।
वंदे मातरम की रचना के 150वीं वर्षपूर्ति पर वंदेमातरम के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर अपनी बात रखते हुए मुख्य वक्ता डॉ. मधु सिंह, खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज, कोलकाता ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ गीत नहीं है बल्कि भारत की पहचान है। यह पूरे देश की भौगोलिक सीमाओं के बीच सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पुल है जिससे होकर हमें स्वतंत्रता मिली।
इस अवसर पर उप महाप्रबंधक,एफजीएमओ राजेश कुमार ने कहा कि यह बंगाल के लिए बहुत ही गर्व की बात है कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान बंगाल की धरती पर लिखी गई थी। जो पूरे राष्ट्र के लिए सतत सम्मान की बात है। आंचलिक प्रबंधक मनीष फुलरे ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में हिन्दी की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि वंदे मातरम् गीत हमेशा भारत के नागरिकों को एकता और संप्रभुता की प्रेरणा देता रहेगा। बांसुरी वादन सौरभ कुमार ने किया।
इस संगोष्ठी में बैंक ऑफ इंडिया आंचलिक कार्यालय, कोलकाता एवं एफजीएमओ, कोलकाता के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन निरंजन कुमार बर्नवाल, मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) ने किया। निरंजन कुमार बर्नवाल, मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) ने कहा कि ऐसे विशिष्ट कार्यक्रम का आयोजन करने का मुख्य प्रयोजन यह है कि यह हमें एक भारतीय नागरिक के रूप में वर्तमान में कर्तव्यों का अहसास दिलाता है और भविष्य की जिम्मेदारी का भी भान कराता है। धन्यवाद ज्ञापन महेंद्र नाथ सोरेन, सहायक महाप्रबंधक, एफजीएमओ कोलकाता ने दिया।