I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और ऑफिस में एन्फोर्समेंट डिरेक्टोरेट (ED) की छापेमारी को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गयी है। शुक्रवार को ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट में इस मामले की तुरंत सुनवाई का आवेदन किया। इसके बाद से ही संभावनाएं जतायी जा रही थी कि केंद्रीय जांच एजेंसी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकती है।
लेकिन उससे पहले ही शनिवार को राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गयी। शनिवार को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया। जानकारों का मानना है कि अगर ED सुप्रीम कोर्ट में आवेदन करती है तो एकतरफा सुनवाई को रोकने के लिए ही राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।
ऐसे में यह देखना होगा कि ED की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया जा रहा है अथवा नहीं।
गौरतलब है कि कोयला तस्करी के मामले में गुरुवार को I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के ऑफिस और घर पर ED की छापेमारी हुई थी। चुनाव से संबंधित रणनीतियों को बनाने में I-PAC साल 2019 से ही तृणमूल की मदद करता आ रहा है। छापेमारी के बाद तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल की रणनीतियों को 'चुराने' के लिए ही यह छापेमारी की गयी।
I-PAC के ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पर ED की छापेमारी के दौरान जिस तरह से मुख्यमंत्री पहुंच गयी थी और केंद्रीय जांच एजेंसी के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज करवाया, इसे देखकर गुरुवार से ही राजनैतिक विवाद शुरू हो गया है।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ 'गैरकानूनी' और 'असंवैधानिक' कदम उठाने का आरोप लगाया है। ED और राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का फैसला लिया है और कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार को न्यायाधीश शुभ्रा घोष की खंडपीठ में दोनों पक्षों के आवेदनों की सुनवाई होने तो वाली थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार की दोपहर करीब 2:30 बजे जैसे ही न्यायाधीश शुभ्रा घोष की खंडपीठ में सुनवाई शुरू होने वाली थी, वहां वकीलों और इंटरर्न की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति यह थी कि पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। जस्टिस घोष ने भीड़ को देखते हुए उन वकीलों और इंटरर्न को बाहर जाने को कहा जो इस केस से जुड़े हुए नहीं थे। उन्होंने 5 मिनट का समय दिया और चेतावनी दी कि अगर भीड़ कम नहीं हुई तो वह केस की सुनवाई नहीं करेंगी।
बताया जाता है कि तृणमूल सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने भी लोगों से बाहर जाने की अपील की लेकिन वकीलों के बीच धक्का-मुक्की और बहसबाजी शुरू हो गई। अव्यवस्था से नाराज होकर जस्टिस शुभ्रा घोष सुनवाई को स्थगित कर दिया और वहां से चली गईं।