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5 सालों बाद क्यों हुई ED की छापेमारी? गोवा का मामला उछाल कर ED ने किया कौन सा दावा?

ED का दावा है कि कोयला तस्करी के मुख्य आरोपी अनुप माझी के सूत्र से ही गोवा में काम करने वाली दो कंपनियों का नाम सामने आया था।

By Moumita Bhattacharya

Jan 10, 2026 10:52 IST

साल 2020 में जो FIR दर्ज हुई थी, उसके आधार पर साल 2026 में एन्फोर्समेंट डिरेक्टोरेट (ED) ने क्यों तलाशी अभियान चलाया? गुरुवार (7 जनवरी) को I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापेमारी के बारे में ED का दावा था कि 28 नवंबर 2020 को दायर FIR के आधार पर ही यह छापेमारी की गयी है। लेकिन इस छापेमारी में ED ने लगभग 5 सालों का वक्त क्यों लगाया? गुरुवार से ही यह सवाल सबके मन में उठ रहा है।

रास्ते पर, चाय की दुकानों पर से लेकर मेट्रो में हर कोई इस बारे में चर्चाएं कर रहा है। इसका जवाब देते हुए ED के अधिकारियों ने गोवा का एक मामला उछाला है। ED का दावा है कि कोयला तस्करी के मुख्य आरोपी अनुप माझी के सूत्र से ही गोवा में काम करने वाली दो कंपनियों का नाम सामने आया था।

ED के अधिकारियों का दावा है कि उन दोनों कंपनियों के बारे में जांच के दौरान ही उन्हें I-PAC के बारे में पता चला। इन दोनों कंपनियों के साथ I-PAC का कोई संबंध है भी अथवा नहीं और अगर है तो किस तरह का संबंध है? ED के अधिकारी इसी बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

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बता दें, कोयला तस्करी को लेकर CBI द्वारा दर्ज मामले के आधार पर साल 2020 में ED ने जांच शुरू की थी। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक ED का दावा है कि दिसंबर 2017 से लेकर अक्तूबर 2020 तक गैरकानूनी रूप से कोयला तस्करी कर 1750 करोड़ रुपए बनाए गए थे। आरोप है कि इतनी बड़ी मात्रा में धन को हवाला में लगाया गया था।

इसलिए ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की जांच करना शुरू किया था। केंद्रीय जांच अधिकारियों का दावा है कि 26 अगस्त 2020 में अनुप का एक अकाउंटेंट और एक व्यवसायी के माध्यम से ह्वाट्स ऐप चैट जांच अधिकारियों के सामने आया था।

ED को वहीं से हवाला में रुपए लगाने का संकेत मिला था। चेन प्रक्रिया के तहत संस्थान के एक के बाद एक कर्मचारियों से लेकर डायरेक्टर तक के पद तक के अधिकारियों को बुलाकर पूछताछ शुरू की गयी। जांच अधिकारियों के हाथों में एक के बाद एक कई दस्तावेज और जानकारियां हाथ लगने लगी। उन सभी व्यवसायियों और कंपनी के कर्मचारियों का बयान दर्ज किया गया।

दावा किया जा रहा है कि उन बयानों से ही पता चला कि साल 2021-22 के दौरान हवाला के माध्यम से कोलकाता से 20 करोड़ रुपए गोवा भेजे गए थे। गौरतलब है कि साल 2022 में गोवा में विधानसभा चुनाव हुए थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उससे ठीक पहले इतनी भारी मात्रा में रुपए क्यों भेजे गए? ED के अधिकारियों का दावा है कि इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिए ही छापेमारी की जा रही है।

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