लखनऊ: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) के दौरान मतदाता सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए बुक-ए-कॉल विद बीएलओ सुविधा शुरू की है। इस बीच दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 6 फरवरी 2026 तक खुली रहेगी। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मतदाता अब अपने संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के साथ फोन कॉल बुक कर सकते हैं ताकि मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी या सहायता प्राप्त की जा सके। इसमें नाम जोड़ने, हटाने या विवरण में सुधार से संबंधित सेवाएं शामिल हैं। यह सुविधा निर्वाचन आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in और ECINET मोबाइल एप्लिकेशन पर उपलब्ध है। पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉगिन करने या ओटीपी के माध्यम से साइन-अप करने के बाद, मतदाता अपना EPIC नंबर या रेफरेंस नंबर दर्ज कर कॉल बुक कर सकते हैं। वैकल्पिक रूप से राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र और बूथ नंबर जैसी जानकारी देकर भी कॉल बुक की जा सकती है। संबंधित बीएलओ 48 घंटे के भीतर मतदाता से संपर्क करेगा। उत्तर प्रदेश के लिए मसौदा मतदाता सूची मंगलवार को प्रकाशित की गई थी, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 2.89 करोड़ मतदाताओं को बाहर किया गया और 12.55 करोड़ मतदाताओं को बरकरार रखा गया।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने मतदाताओं से अपील की है कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित किसी भी प्रश्न के लिए इस सुविधा का अधिकतम उपयोग करें। मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी एसआईआर डेली बुलेटिन के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक खुली रहेगी। इस अवधि के दौरान पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए दावा और नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक घोषणाएं प्राप्त होने के बाद ही नामों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। बुलेटिन में यह भी बताया गया कि राजनीतिक दलों ने बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए हैं, जो जनता से दावे (फॉर्म-6) और आपत्तियां (फॉर्म-7) एकत्र कर आवश्यक घोषणाओं के साथ जमा कर रहे हैं। निर्धारित प्रपत्र या घोषणा के बिना की गई सामान्य शिकायतों को मान्य नहीं माना जाएगा। बुलेटिन के अनुसार, 12,55,56,025 मतदाताओं वाली मसौदा मतदाता सूची के खिलाफ राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।