लखनऊ : उत्तर प्रदेश पुलिस का यूपी कॉप ऐप आम लोगों के लिए डिजिटल पुलिस स्टेशन की तरह काम कर रहा है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बताया कि इस ऐप और नागरिक पोर्टल के कारण लोगों को अब छोटी-छोटी सेवाओं के लिए थाने जाने की जरूरत काफी कम हो गई है और सेवाओं के निपटारे में लगने वाला समय भी घटा है।
2019 में शुरू किए गए यूपी कॉप ऐप को अब तक 50 लाख से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं। इस ऐप के जरिए लोग घर बैठे एफआईआर दर्ज कर सकते हैं एफआईआर की कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं खोई हुई वस्तुओं की रिपोर्ट कर सकते हैं और कई तरह के सत्यापन से जुड़ी सेवाएं ले सकते हैं। अब तक 2.1 करोड़ से अधिक एफआईआर की प्रतियां ऑनलाइन डाउनलोड की जा चुकी हैं जबकि 7.3 लाख से ज्यादा लोगों ने खोई हुई वस्तुओं की सूचना इन डिजिटल माध्यमों से दी है।
यूपी पुलिस के ये डिजिटल प्लेटफॉर्म कुल 27 तरह की सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायकों और कर्मचारियों का सत्यापन भी शामिल है। डीजीपी के अनुसार, तकनीक को पुलिसिंग से जोड़ने का मकसद व्यवस्था को लोगों के अनुकूल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। इसका असर यह हुआ है कि सेवाओं के निपटारे की प्रक्रिया अब ज्यादा मानकीकृत और समयबद्ध हो गई है।
राजीव कृष्ण ने बताया कि ऐप में ऐसे फीचर जोड़े गए हैं, जिनसे आवेदकों को उनके आवेदन की स्थिति की जानकारी तुरंत मिलती रहती है। समय के आंकड़ों में भी बड़ा सुधार हुआ है। चरित्र सत्यापन अब औसतन छह दिन में हो जाता है, किरायेदार सत्यापन में लगभग आठ दिन लगते हैं और कर्मचारी सत्यापन करीब पांच दिन में पूरा हो रहा है, जो पहले काफी अधिक समय लेते थे।
डीजीपी ने कहा कि यह डिजिटल पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डिजिटल पुलिसिंग की सोच को जमीन पर उतारने का उदाहरण है और इससे आम जनता को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद पुलिस सेवाएं मिल रही हैं।