लखनऊ: उत्तर प्रदेश के रामपुर ज़िले में पिछले 33 वर्षों से पढ़ा रही एक शिक्षिका के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर जिला मजिस्ट्रेट अजय कुमार द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि मामले में कार्रवाई जारी है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग की जांच में यह सामने आया है कि संबंधित शिक्षिका पाकिस्तानी मूल की हैं।
एएनआई से बातचीत में डीएम ने कहा कि शिक्षा विभाग की जांच में पता चला है कि वह पाकिस्तानी मूल की हैं। उसी आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। मंगलवार को अज़ीम नगर थाना में एक कथित पाकिस्तानी नागरिक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शिकायत बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की ओर से दी गई थी। आरोप है कि शिक्षिका ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छिपाकर वर्ष 1992 में शिक्षक की नौकरी हासिल की, जबकि यह मामला 33 साल पुराना है।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार शिकायत में फरजाना, पुत्री अख्तर अली, रामपुर शहर के आतिशबाज मोहल्ले की रहने वाली हैं। उनकी शादी 17 जून 1979 को पाकिस्तान के सिबगत अली से हुई थी। शादी के बाद वे पाकिस्तान चली गईं और वहां की नागरिकता हासिल कर ली। पाकिस्तान में उन्होंने दो बेटियों को जन्म दिया। शिकायत में आगे कहा गया है कि शादी के करीब तीन साल बाद फरजाना का तलाक हो गया और वे अपनी बेटियों के साथ रामपुर लौट आईं। 1983 में वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी भारत में रहने के आरोप में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) ने उनके खिलाफ सिटी कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया था।
इसके बावजूद, फरजाना ने 22 जनवरी 1992 को अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छिपाकर शिक्षक के रूप में नियुक्ति हासिल कर ली। एलआईयू की जांच के बाद शिक्षिका को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। सरकार के आदेश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अजीमनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद यह केस दर्ज हुआ। मामले से जुड़ी और जानकारी का इंतजार है।