कोलकाताः केंद्र के गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में बंगाल भाजपा के नेताओं के साथ बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र में काम आई चुनावी रणनीति बंगाल में लागू नहीं होगी। शाह का मानना है कि मजबूत संगठन ही चुनाव जीतने का आधार है, और केवल विपक्ष के वोट बैंक पर ध्यान देने से कुछ हासिल नहीं होगा।
महाराष्ट्र के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अनुभव के आधार पर अमित शाह ने बंगाल भाजपा को यह सीख दी कि वहां भाजपा और शिवसेना दोनों के मजबूत संगठन की वजह से 43 प्रतिशत वोट देने वाले मतदाताओं को चुनाव के दिन बूथ तक लाया जा सका। विपक्षी दलों के वोट बैंक को निशाना बनाने की जरूरत नहीं पड़ी।
बंगाल में स्थिति अलग
बंगाल में भाजपा के पास महाराष्ट्र जैसी मजबूत बूथ-स्तरीय संगठन नहीं है। इसके विपरीत, तृणमूल कांग्रेस का संगठन बहुत मजबूत है। यही कारण है कि अमित शाह ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को जितना संभव हो सके मजबूत किया जाए।
शाह ने बंगाल में पार्टी की रणनीति को दो मुख्य हिस्सों में बांटा है। पहला, संगठन मजबूत करना। दूसरा, जहां संगठन कमजोर है, वहां राजनीतिक नरेटिव और जन संपर्क के जरिए कमी पूरी करना। इसका मतलब यह कि संगठन और राजनीतिक संदेश-दोनों का संतुलित इस्तेमाल पार्टी की मुख्य रणनीति का हिस्सा होगा।
चार्जशीट रणनीति और स्थानीय मुद्दों पर जोर
भाजपा ने राज्य के 294 विधानसभा क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ ‘चार्जशीट’ तैयार करने का निर्णय लिया है। इस चार्जशीट में स्थानीय समस्याएं और जनता की शिकायतें शामिल होंगी। पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह ‘चार्जशीट’ वितरित करेंगे।
हालांकि, संगठन की कमजोरी के कारण यह आसान काम नहीं है। राज्य में लगभग 40,000 बूथ हैं, लेकिन इनमें से कई में भाजपा कमिटी अभी तक नहीं बन पाई। यही कारण है कि राजनीतिक संदेश को प्रभावी तरीके से फैलाना भी चुनौतीपूर्ण है।
भाजपा के नेताओं का मानना है कि सालों पहले से पार्टी को बंगाल में संगठन मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए था। अब विधानसभा चुनाव से पहले यह कार्य तेजी से करना पड़ेगा।
पिछले चुनावों का आंकलन
2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 48 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा को लगभग 38 प्रतिशत वोट मिले। इस चुनाव में वोट अंतर 10 प्रतिशत था।
2024 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में तृणमूल को 46 प्रतिशत और भाजपा को 39 प्रतिशत वोट मिले। इस प्रकार वोट अंतर घटकर अब सिर्फ 7 प्रतिशत रह गया है।
मजबूत संगठन ही जीत की कुंजी
शाह मानते हैं कि इस अंतर को कम करने का अंतिम भरोसा मजबूत संगठन पर ही रहेगा, न कि केवल वोट बैंक को लक्ष्य बनाने से।
महाराष्ट्र की तरह बंगाल में विपक्ष के वोट बैंक को नजरअंदाज करके जीतना संभव नहीं है। संगठन मजबूत करना और राजनीतिक संदेश घर-घर तक पहुंचाना ही भाजपा की मुख्य रणनीति होगी। अमित शाह लगातार दिल्ली से बंगाल में पार्टी की गतिविधियों और संगठन पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।