राज्य में SIR की सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है। ऐसी स्थिति में सोमवार (12 जनवरी) को एक बार फिर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। तीन पन्नों के इस पत्र में मुख्यमंत्री ने 'SIR की प्रक्रिया में पद्धतिगत गलतियों' को लेकर शिकायत की है।
इसके साथ ही उन्होंने फिर से आरोप लगाया है कि SIR की सुनवाई की प्रक्रिया के बहाने आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। बता दें, इसे लेकर अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कुल 5 बार चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया के संबंध में पत्र लिखा है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में क्या लिखा?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे इस पत्र में ममता बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान मतदाता आवश्यक दस्तवेज जमा कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें परेशानी का शिकार बनना पड़ रहा है। सुनवाई की प्रक्रिया में उपस्थित होने और आवश्यक कागजात जमा करने के बावजूद कोई रिसीविंग कॉपी नहीं दी जा रही है।
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उन्हें कोई प्राप्ति की कोई रसीद भी नहीं दी जा रही है। ममता बनर्जी ने आशंका जतायी है कि इसकी वजह से कहीं मतदाताओं का नाम 'नॉट फाउंड' दिखाकर तो हटा नहीं दिया जाएगा।
इसके साथ ही ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि साल 2002 में जिन मतदाताओं का डिजिटाइजेशन नहीं हुआ था लेकिन मतदाता सूची में नाम है ऐसे लोगों को सबसे ज्यादा समस्याएं हो रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से अगणतांत्रिक और असंवैधानिक है। बता दें, इससे पहले भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई बार SIR की प्रक्रिया के दौरान आम लोगों की परेशानियों के बारे में बताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिख चुकी हैं। उन्होंने दावा किया है कि SIR की प्रक्रिया में संवेदनशीलता का अभाव है।