🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

वाम आंदोलन के कद्दावर नेता समीर पुटातुंडू का निधन

74 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जताया शोक।

By रिनिका राय चौधुरी, Posted by: श्वेता सिंह

Jan 12, 2026 13:39 IST

कोलकाता: दिग्गज वामपंथी नेता समीर पुटातुंडू का लंबी बीमारी के बाद कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। मृत्यु के समय उनकी उम्र 74 वर्ष थी। रविवार रात करीब सवा 11 बजे दक्षिण कोलकाता के मुकुंदपुर इलाके स्थित एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से राजनीतिक जगत में शोक की लहर फैल गई है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

परिवार के सूत्रों के अनुसार, समीर पुटातुंडू काफी समय से अस्वस्थ थे। उनकी पत्नी और पीडीएस (पार्टी ऑफ डेमोक्रेटिक सोशलिज़्म) की नेता अनुराधा पुटातुंडू ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर को दक्षिण 24 परगना स्थित उनके पैतृक घर ले जाया जाएगा। वहीं पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

समीर पुटातुंडू को माकपा के एक कुशल और मजबूत संगठनकर्ता के रूप में जाना जाता था। वे दक्षिण 24 परगना जिले में माकपा के जिला सचिव भी रह चुके थे। हालांकि पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों के चलते वर्ष 2001 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने सैफुद्दीन चौधरी के साथ माकपा छोड़ दिया था।

सीपीएम से अलग होने के बाद उन्होंने नई पार्टी पीडीएस (पार्टी ऑफ डेमोक्रेटिक सोशलिज़्म) का गठन किया। इतना ही नहीं, उसी विधानसभा चुनाव में उन्होंने जादवपुर सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था, हालांकि चुनाव में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।

बाद के वर्षों में सिंगूर और नंदीग्राम के भूमि आंदोलन के दौरान समीर पुटातुंडू ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आए थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उन्हें व्यक्तिगत रूप से करीब से जानती थीं। उनके निधन पर ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, “एक समय वाम आंदोलन के मजबूत नेता समीर पुटातुंडू को खोकर मैं बेहद मर्माहत हूं। ऐसा लग रहा है जैसे मैंने अपने किसी करीबी को खो दिया हो। सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन में हमने साथ काम किया था। अनुराधा दी को सांत्वना देने के लिए शब्द नहीं हैं, फिर भी मैं हर समय उनके साथ हूं।” वरिष्ठ वामपंथी नेता के निधन से राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है।

Prev Article
वोट बैंक नहीं, संगठन ही है भाजपा की जीत की कुंजी: अमित शाह
Next Article
वोटर लिस्ट की हर गड़बड़ी के लिए DEO जिम्मेदार, आयोग का कड़ा संदेश

Articles you may like: