कोलकाता: वोट-रणनीतिकार संस्था I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) के कोलकाता कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं-एक ED की ओर से और दूसरी ED के तीन अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से दाखिल की गई है।
इन याचिकाओं में पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। ED ने अपनी याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा, आईपीएस अधिकारी प्रियव्रत राय और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को पक्षकार बनाया है।
ED का आरोप है कि I-PAC के कोलकाता कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर चल रही तलाशी अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच एजेंसी के काम में बाधा डाली। केंद्रीय एजेंसी का दावा है कि तलाशी के समय हस्तक्षेप किए जाने के कारण कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हाथ नहीं लग सके, जो जांच के लिए बेहद जरूरी थे।
इससे पहले ED ने इस मामले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी। शुक्रवार को यह मामला न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष की अदालत में सूचीबद्ध हुआ था, लेकिन अदालत में अत्यधिक शोर-शराबे और भीड़ के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। नतीजतन मामले को टाल दिया गया। संभावना है कि 14 जनवरी को इस पर सुनवाई हो सकती है। ED ने इस मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी, हालांकि अदालत ने उस आग्रह को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की जा चुकी है। अब प्रवर्तन निदेशालय ने सीधे शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर इस मामले को नई दिशा दे दी है।