विशाखापत्तनम: केंद्रीय पत्तन, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को यहाँ आंध्र प्रदेश के पहले लाइटहाउस संग्रहालय की घोषणा की। इससे भारत के पूर्वी तट पर लाइटहाउस-आधारित पर्यटन को और मजबूती मिलेगी।
इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने कहा कि जनभागीदारी का पैमाना देशभर में लाइटहाउस पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। महोत्सव में दो दिनों में 50,000 से अधिक आगंतुक पहुंचे।
उन्होंने कहा, “विशाखापत्तनम में आंध्र प्रदेश का पहला लाइटहाउस संग्रहालय समुद्री शिक्षा, विरासत संरक्षण और पर्यटन प्रोत्साहन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे भारत के पूर्वी तट पर लाइटहाउस-आधारित पर्यटन और सशक्त होगा।”
संग्रहालय परियोजना के लिए विशाखापत्तनम पोर्ट प्राधिकरण और लाइटहाउस एवं लाइटशिप महानिदेशालय के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत बंदरगाह परिसर के पुराने लाइटहाउस क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बंदरगाह शहर में जनता की जबरदस्त प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि ये प्रतीकात्मक संरचनाएँ संस्कृति, पर्यटन और सामुदायिक सहभागिता के सजीव केंद्रों के रूप में विकसित हो रही हैं। इस महोत्सव में परिवारों, युवाओं, कलाकारों, उद्यमियों, छात्रों और पर्यटकों की भागीदारी रही, जिससे यह समावेशी और जन-केंद्रित बना तथा समुद्री विरासत और तटीय संस्कृति के केंद्र के रूप में विशाखापत्तनम की उभरती पहचान और मजबूत हुई।
लाइटहाउस पर्यटन में वृद्धि को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में लाइटहाउस स्थलों पर आगंतुकों की संख्या पाँच गुना बढ़ी है, जिससे स्थानीय आजीविका और समुद्री जागरूकता को बढ़ावा मिला है। देशभर में 75 लाइटहाउसों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किए जाने के साथ-साथ सरकार अतिरिक्त स्थलों की पहचान करने की योजना बना रही है, जिनमें आंध्र प्रदेश के उपयुक्त स्थान भी शामिल हैं।
महोत्सव का उद्घाटन 9 जनवरी को पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया था। उन्होंने कहा था कि लाइटहाउस अब केवल नौवहन सहायता नहीं रहे, बल्कि संस्कृति, सामुदायिक सहभागिता और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।
महोत्सव के दौरान नाट्य सन्निधालय द्वारा प्रस्तुत कुचिपुड़ी नृत्य, जिसका नेतृत्व सन्निधा राजसागी ने किया, तथा पूर्वोत्तर भारत के लोकनृत्य सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। आंध्र प्रदेश भर से आई 40 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की स्टॉलों पर हस्तशिल्प, स्वदेशी उत्पाद और तटीय व्यंजन प्रदर्शित किए गए, जिससे महिला-नेतृत्व वाले उद्यमिता को रेखांकित किया गया।
विशाखापत्तनम तट पर लाइटहाउसों की रात्रिकालीन रोशनी, इंटरैक्टिव ज़ोन और प्रदर्शनी महोत्सव के दौरान प्रमुख आकर्षण रहे।