डॉ. शशि थरूर एक आम राजनेता की स्टीरियोटाइप इमेज से लंबे समय से अलग रहे हैं। एक विश्व स्तरीय लेखक, पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजनयिक और अनुभवी संसद सदस्य वह अधिकारियों द्वारा ली गई नीतियों और फैसलों के मामले में लीक से हटकर राय रखने के लिए भी जाने जाते हैं।
क्रिकेट के शौकीन डॉ. थरूर ने एपीजे कोलकाता लिटरेरी फेस्टिवल 2026 (Apeejay Kolkata Literary Festival 2026) में बतौर विशेष अतिथि पहुंचे। उन्होंने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर किए जाने का विरोध किया और बताया कि यह कदम बांग्लादेश में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित था। साथ यह भी बताया कि खेल और खिलाड़ियों को राजनीति से दूर रखना क्यों जरूरी होता है।
'छोटी सोच' का नमूना दिखी मुस्तफिजुर रहमान को बाहर करना
शशि थरूर उन कुछ लोगों में से एक हैं जिन्होंने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से बाहर किए जाने के फैसले का विरोध किया। यह फैसला BCCI ने पड़ोसी देश में हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण लिया था। जब उनसे इस फैसले पर उनके विचारों के बारे में पूछा गया तो डॉ. थरूर ने कहा, "मुस्तफिजुर के मामले में मेरी बात बहुत सीधी है। मुझे लगता है कि हमें उस तरह की छोटी सोच से कहीं ज्यादा बड़ा समाज होना चाहिए जो उस फैसले में सामने आई।
BCCI ने खिलाड़ियों को लेकर स्पष्ट कर दिया था; उन्हें योग्य और क्वालिफाइड माना गया था और टीम ने उनमें से से किसी एक को चुना। जब यह सब हो चुका है, रकम तय हो चुकी है, अध्याय भी सौंपा जा चुका है, टीम उसका इंतजार कर रही है तो आप अचानक पीछे कैसे हट सकते हैं? किस आधार पर? आप किस बात की सजा दे रहे हैं?"
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अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए थरूर कहते हैं, "बांग्लादेश में कुछ लोग गलत काम कर रहे हैं और हम सबने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई है। हम नहीं चाहते कि सिर्फ धर्म के आधार पर बांग्लादेश में बेगुनाह लोगों पर हमला किया जाए और उन्हें मारा जाए। और मुझे यकीन है कि हम इसे रोकने के लिए सभी कूटनीतिक तरीकों और बातचीत का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही जब हम इस तरह की चीजें करते हैं तो हम असल में हालात और खराब कर देते हैं।"
उन्होंने कहा कि हम बांग्लादेश के लोगों के हीरो के साथ जिस तरह का बर्ताव करते हैं उससे हम वहां के लोगों की भावनाओं को भड़काते हैं। मुस्तफिजुर ने कभी भी नफरत भरी बातों का समर्थन करने वाली कोई बात नहीं कही। उन्होंने भारत-विरोधी, हिंदू-विरोधी या किसी भी चीज के खिलाफ कुछ नहीं कहा - वह एक खिलाड़ी हैं।
हम उनपर बांग्लादेश की सड़कों पर कानून तोड़ने वाले गुंडों का बोझ क्यों लाद रहे हैं? हम किसे सजा दे रहे हैं? क्या हम किसी देश को सजा दे रहे हैं? क्या हम गलत काम करने वालों को सजा दे रहे हैं? क्या हम अपराधियों को सजा दे रहे हैं? हम किसे सजा दे रहे हैं?"
'खेल अकेले क्यों उठाए बोझ?'
खेल और खिलाड़ियों को राजनीति के झमेलों से दूर रखने की बात का समर्थन करते हुए शशि थरूर ने कहा, "अगर आप एक बांग्लादेशी खिलाड़ी पर प्रतिबंध लगाएंगे, तो क्या आप बाकी सभी पर भी प्रतिबंध लगाएंगे? मान लीजिए कि दूसरे खिलाड़ी भी होते। पिछले IPL में लिटन दास और सौम्य सरकार दोनों को चुना गया था।
क्या अब अचानक उन्हें इसलिए बैन कर दिया जाएगा क्योंकि उनके पास गलत पासपोर्ट है? किस तरह का संदेश दिया जा रहा है? जब आपके पास सब कुछ तो बतौर क्रिकेटिंग देश भारत कहां खड़ा है अगर आप यह उम्मीद कर रहे हैं कि सिर्फ क्रिकेट और खेल ही बोझ उठाएंगे?"
उन्होंने आगे कहा, "व्यापार संबंधों से लेकर एक-दूसरे के देशों में दूतावास, बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति, आप बांग्लादेशी कुटनीतिक से मिल रहे हैं। हमारे विदेश मंत्री अधिकारपूर्वक बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने और उनके बेटे से मिलने गए थे, जो उस देश के संभावित नेता हैं। ये सब चीजें हो रही हैं और फिर अचानक क्रिकेट ही एक ऐसी जगह है जहां आप कुछ नहीं कर सकते? मुझे इसका लॉजिक समझ नहीं आता।"
'बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला'
शशि थरूर ने बांग्लादेशी क्रिकेटर को भारत की मुख्य क्रिकेट चैंपियनशिप से बाहर करने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह फैसला 'बिना सोचे-समझे' लिया गया था। "इसलिए, मेरी चिंता यह है कि इस पर ठीक से सोचा नहीं गया। यह हम पर बुरा असर डालता है और अब तुरंत ही हमें बांग्लादेश से प्रतिक्रिया मिल रही है जो कह रहे हैं कि वे वर्ल्ड कप के लिए भारत नहीं आएंगे।
अब क्या हम इस सारी राजनीति से खुद को मेजबान देश के तौर पर अयोग्य साबित करने जा रहे हैं? इस पर शांत और समझदारी से सोचने की जरूरत है और एक दोस्ताना समाधान निकालना चाहिए। फिर राजनयिकों को कूटनीति का काम करने देना चाहिए। खिलाड़ियों को खेल खेलने देना चाहिए।," थरूर ने कहा।
डॉ. शशि थरूर ने इस बात पर जोर देते हुए कि खेल को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठना चाहिए, अपना तर्क दिया कि मुस्तफिज़ुर रहमान को बाहर करने जैसे फैसलों से एक निष्पक्ष और परिपक्व खेल राष्ट्र के तौर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा है। शांति और समझदारी से सोचने की अपील करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कूटनीति सरकारों को संभालनी चाहिए खिलाड़ियों को नहीं। अधिकारियों से आग्रह किया कि वे खिलाड़ियों को आजादी से खेलने दें जबकि बड़े राजनीतिक मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाए।