रविवार की सुबह समुद्र के किनारे कुछ पर्यटक चहलकदमी कर रहे थे। एक ओर गहरा नीला समुद्र और उसके ठीक पास से होकर गुजरता सुनहरे रेत का समुद्रतट लेकिन तभी...! पर्यटकों के सामने कुछ ऐसा आ गया कि उन्हें काटो तो खून नहीं। समुद्र की तेज हवाओं की वजह से झूल रहे 5 इंसानी सिर जो एक रस्सी के सहारे खूंटी से बंधे हुए थे।
पास में ही खून से लिखी हुई एक चेतावनी जो बालू में गड़ी हुई थी...यह चेतावनी उन दलालों के लिए थी जो प्यूर्टो लोपेज मत्स्य बंदरगाह पर मछुआरों से रुपए ऐंठते हैं। घटना इक्वाडोर के समुद्रतट की बतायी जाती है।
स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह भयावह घटना दो आपराधिक समूहों के आपसी झगड़ों का नतीजा है। बताया जाता है कि इस इलाके में अंतर्राष्ट्रीय ड्रग कार्टेल से जुड़े कई ड्रग तस्करी के समूह काफी सक्रिय हैं। वे अपने गैर-कानूनी कामों के लिए मछुआरों की नावों का इस्तेमाल करते हैं।
प्यूर्टो लोपेज, मनाबी प्रांत में मौजूद है। जमीन पर कब्जे और ड्रग तस्करी के रास्तों पर नियंत्रण बनाने को लेकर हुए झगड़ों की वजह से हाल ही में कई हिंसक घटनाएं भी घट चुकी हैं।
किसी समय इक्वाडोर एक बहुत ही शांत देश हुआ करता था लेकिन अब लैटिन अमेरिकी ड्रग माफियाओं का अड्डा बन गया है। साल 2025 में इस लैटिन अमेरिकी देश में 9,000 से ज्यादा लोगों की हत्याएं हुई थी जो अब तक का रिकॉर्ड है।
कोलंबिया और पेरू से आने वाली ड्रग्स के ट्रांजिट रूट पर कब्जा करने को लेकर होने वाले खूनी संघर्षों में अंतर्राष्ट्रीय ड्रग कार्टेल ने स्थानीय आपराधिक समूहों के साथ हाथ मिला लिया है। मनाबी प्रांत में आपातकाल लागू करने के बावजूद खून-खराबे को रोका नहीं जा सका है। दो सप्ताह पहले ही ड्रग माफियाओं की गोली का शिकार 6 लोग बने थे।
क्या अमेरिकी सेना के अभियान से बदलेगी तस्वीर?
ट्रंप प्रशासन ने इसी ड्रग-आतंक का हवाला देकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण किया है। ट्रंप ने इक्वाडोर में भी ऐसे ही ऑपरेशन की धमकी दी है। इस भयावह घटना के बाद ट्रंप की धमकी एक बार फिर से प्रासंगिक बन गयी है। हालांकि वेनेजुएला के मामले में जैसे-जैसे समय बीत रहा है यह भी स्पष्ट होता जा रहा है कि ड्रग माफिया को जड़ से उखाड़ने की बात खोखली है।
असली मकसद देश की सम्पदाओं पर कब्जा करना है। इसलिए इक्वाडोर में अगर अमेरिकी सेना अभियान चलाती है तो तस्वीर बदल जाएगी, ऐसा सोचने की कोई वजह नहीं है। ऐसे हालात में वहां की आम जनता का सवाल यह है कि हमें इस नरक से कब और कैसे छुटकारा मिलेगा?