खैबर पख्तूनख्वा (पाकिस्तान): पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक मार्गों की तीन महीने से अधिक समय से जारी लंबी नाकेबंदी के कारण राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर अरबों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। डॉन समाचार ने अपनी रिपोर्ट में रविवार को कारोबारी प्रतिनिधियों के हवाले से इस बात का उल्लेख किया है।
उन्होंने कहा कि सीमा-पार व्यापार के ठप होने से निर्यात, आपसी कारोबार, परिवहन कंपनियों और सरकारी राजस्व को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे देश की समग्र अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा (केपी) को, जहां व्यापारी अफगानिस्तान के साथ व्यापार पर बहुत अधिक निर्भर थे।
ये टिप्पणियां पाकिस्तान–अफगानिस्तान संयुक्त चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जियाउल हक सरहदी और सरहद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सदस्य मंज़ूर इलाही ने एक संयुक्त प्रेस बयान में कीं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से निकटता, गहरे जातीय और व्यापारिक संबंधों तथा सीमा-पार कारोबार पर मजबूत निर्भरता के कारण खैबर पख्तूनख्वा को अन्य प्रांतों की तुलना में अधिक नुकसान हुआ है। अफगानिस्तान को पाकिस्तान के 90 प्रतिशत से अधिक निर्यात खैबर पख्तूनख्वा के सीमा शुल्क प्रतिष्ठानों के माध्यम से मुख्य रूप से तोरखम क्रॉसिंग से होता था।
डॉन ने रिपोर्ट में कहा गया है कि कारोबारियों के अनुसार सीमेंट, वस्त्र, दवाइयों, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों जैसी वस्तुओं की खेपें रुकने से प्रांत को अनुमानित 2.5 अरब पाकिस्तानी रुपये के निर्यात नुकसान का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष के पहले पाँच महीनों में व्यापार गतिविधियों में कमी और सीमा शुल्क आय घटने के कारण खैबर पख्तूनख्वा को लगभग 2.5 अरब पाकिस्तानी रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। प्रांत के निर्यातकों को प्रतिदिन 40 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि अरबों रुपये का माल फंसा हुआ है। जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं सड़ गईं, जबकि दवाइयाँ और कच्चा माल अपनी मियाद पूरी कर चुके, जिससे अपूरणीय वित्तीय क्षति हुई।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि मध्य एशिया के लिए अफगान पारगमन व्यापार में तेज गिरावट आई है, जिससे प्रांत के लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्रों तथा उनसे जुड़ी आय को नुकसान पहुंचा है। इसमें पहले सालाना 4,000 से 5,000 खेपें शामिल होती थीं। व्यापक आर्थिक प्रभावों की ओर इशारा करते हुए कारोबारियों ने चेतावनी दी कि सीमा बंद रहने से कारखाने बंद होने और नौकरियां जाने का खतरा बढ़ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा के औद्योगिक क्षेत्र का लगभग 90 प्रतिशत आयात और निर्यात के लिए अफगान बाजारों पर निर्भर है और जारी बाधा से बड़े पैमाने पर संयंत्र बंद होने, भारी बेरोजगारी और बढ़ती आर्थिक कठिनाइयों के बीच क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है।
परिवहन और श्रम क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में हजारों ट्रक चालक, मजदूर और दिहाड़ी कामगार अपनी आजीविका खो चुके हैं, जबकि पेशावर और अन्य शहरों के बाजारों में कारोबार तेज़ी से धीमा पड़ा है। फलों, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं के सड़ने से किसानों और व्यापारियों को भी भारी नुकसान हुआ है।
उन्होंने चेतावनी दी कि दीर्घकालिक प्रभाव और भी गंभीर हो सकते हैं क्योंकि अफगानिस्तान व्यापार को ईरान और मध्य एशियाई देशों की ओर मोड़ रहा है, जिससे खैबर पख्तूनख्वा के व्यापारियों के लिए बाजार स्थायी रूप से खोने की आशंका है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार सीमा बंदी से पूरे क्षेत्र में व्यवसाय, राजस्व, रोजगार और स्थिरता पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।