वाशिंगटनः ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। शनिवार रात प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी दफ्तरों और इमारतों में आग लगा दी। बसों और ट्रेनों को भी निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश में हालात और बिगड़ गए और सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़पें हुईं। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और वीडियो फुटेज में पुलिस और सुरक्षा बलों पर गोली चलाने के आरोप भी सामने आए हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया है।
जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन तेज़ हो रहे हैं, वैसे-वैसे कार्रवाई भी सख़्त होती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से ईरान भर में पुलिस और सुरक्षा बल संयुक्त अभियान चला रहे हैं। बावजूद इसके शनिवार रात प्रदर्शनकारी फिर सड़कों पर उतर आए और हालात बेकाबू हो गए। सबसे पहले सड़कों पर खड़ी बसों को आग के हवाले किया गया। इसके बाद गुस्सा सरकारी दफ्तरों पर फूट पड़ा।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेड लगाए लेकिन वे सभी बाधाएं पार करते हुए आगे बढ़ते रहे। छोटे-छोटे समूहों में बंटकर उन्होंने सुरक्षा बलों पर गुरिल्ला अंदाज़ में हमला किया। आरोप है कि जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ बहुमंज़िला इमारतों से प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने के आरोप भी लगे हैं।
सीबीएस न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते दो हफ्तों में हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक 116 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 3,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि शनिवार रात सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में और भी लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन सही संख्या अब तक सामने नहीं आई है। घटनाओं के बाद ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने सख़्त चेतावनी देते हुए कहा, “जो लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे, वे ईश्वर के दुश्मन हैं और इस अपराध की सज़ा मौत है।”
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दे चुके हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर दमन जारी रहा तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। शनिवार की घटनाओं के बाद अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में अधिकारी ने कहा, “ईरान सरकार की दमनकारी नीतियों की पूरी जानकारी राष्ट्रपति को दी गई है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो सीमित सैन्य कार्रवाई पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।”
वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली ख़ामेनेई ने पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘दंगाई’ और ‘साज़िशकर्ता’ बताया है और डोनाल्ड ट्रंप पर भी निशाना साधा। उन्होंने अमेरिका से कहा, “अपने देश के मामलों पर ध्यान दीजिए।”
लेकिन ट्रंप भी पीछे हटते नहीं दिख रहे। शनिवार को उन्होंने ट्रुथ सोशल पर ईरान के विरोध प्रदर्शनों को ‘आजादी की लड़ाई’ बताते हुए लिखा, “पिछले कई दशकों में ईरान कभी भी आज़ादी के इतने करीब नहीं पहुंचा था। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।”
यहीं नहीं, व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने ईरान सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “ईरान मुश्किल में है। आम लोग शहरों पर क़ब्ज़ा कर रहे हैं। अगर अब सरकार ने अपने ही लोगों को मारना शुरू किया, तो हम हस्तक्षेप करेंगे और वहां चोट करेंगे, जहां सबसे ज़्यादा दर्द होगा।”