लंदन: नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई ने कहा है कि ईरान में महिलाओं और लड़कियों की आज़ादी लगातार छीनी जा रही है। ईरानी महिलाओं को लंबे समय से शिक्षा सहित सार्वजनिक जीवन के लगभग हर क्षेत्र से दूर रखा गया है। ये पाबंदियाँ सिर्फ़ स्कूल या पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन के हर पहलू में महिलाओं की स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखते हुए उन्होंने कहा कि ईरान में हो रहे विरोध-प्रदर्शन अचानक नहीं हैं, बल्कि महिलाओं पर वर्षों से लगाए गए सरकारी प्रतिबंधों का नतीजा हैं। ईरानी लड़कियाँ भी दुनिया की अन्य लड़कियों की तरह सम्मान और गरिमा के साथ जीना चाहती हैं।
मलाला ने यह भी कहा कि ईरान के लोगों ने दशकों से इस दमन के खिलाफ़ आवाज़ उठाई है, लेकिन उनकी आवाज़ें दबा दी गईं। ईरान में महिलाओं पर निगरानी, अलगाव और सज़ा की ऐसी व्यवस्था थोप दी गई है, जो उनकी आज़ादी, सुरक्षा और विकल्पों को बुरी तरह सीमित करती है। ईरानी महिलाओं को अपने राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला खुद करने का पूरा अधिकार है। यह भविष्य किसी बाहरी ताक़त या दमनकारी शासन द्वारा नहीं, बल्कि ईरान की जनता- खासतौर पर महिलाओं और लड़कियों के नेतृत्व में तय होना चाहिए।
ईरानी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने भी सरकार की सख़्ती पर सवाल उठाते हुए कहा कि हज़ारों लोग मारे गए या घायल हुए हैं, फिर भी लोग सड़कों पर उतरकर तानाशाही के खिलाफ़ नारे लगा रहे हैं। यह सच्ची बहादुरी है।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान के कई हिस्सों-जैसे अज़रबैजान प्रांत और अराक शहरमें बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और शासन से नाराज़गी के कारण तेज़ हुए हैं।
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक़ अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोगों को गिरफ़्तार कर जेल भेजा गया है। इन घटनाओं पर अमेरिका ने कहा है कि ईरान को लेकर उसके पास सभी विकल्प खुले हैं, हालांकि उसकी पहली प्राथमिकता अब भी कूटनीति ही है।