चंडीगढ़ : चंडीगढ़ की एक महिला अपने परिवार के साथ एक रेस्तरां गई थीं। जीएसटी सहित खाने का कुल बिल 1922 रुपये बना। लेकिन बिल का ब्रेक-अप देखकर वह चौंक गईं। खाने के दौरान उन्होंने बोतलबंद पेयजल (पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर) ऑर्डर किया था। बिल में उस पानी की बोतल की कीमत 55 रुपये लिखी थी, जबकि बोतल पर छपा एमआरपी 20 रुपये था। यह बात ग्राहक को स्वीकार नहीं हुई। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यह घटना दिसंबर 2023 में चंडीगढ़ के एक रेस्तरां में हुई थी।
इस शिकायत को लेकर महिला पहले जिला उपभोक्ता आयोग (डिस्ट्रिक्ट कंज़्यूमर कमीशन) गईं, जहां उनकी शिकायत खारिज कर दी गई। इससे वह हतोत्साहित नहीं हुईं और राज्य उपभोक्ता आयोग (स्टेट कमीशन) में अपील की, जहां उन्होंने खुद ही अपना पक्ष रखा।
ज्यादा पैसे क्यों लिए गए?
2011 के लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज़) अधिनियम के अनुसार किसी भी वस्तु को उसके एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचा नहीं जा सकता। ऐसा करना कानून का उल्लंघन है। स्टेट कमीशन ने कहा कि रेस्तरां ने पानी की बोतल के लिए अतिरिक्त कीमत वसूली है, जो 2019 के कंज़्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अवैध है।
दिसंबर 2025 में इस मामले पर चंडीगढ़ की SCDRC (स्टेट कंज़्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन) ने फैसला सुनाया। आयोग ने रेस्तरां को निर्देश दिया कि जो अतिरिक्त राशि वसूली गई है, वह ग्राहक को लौटाई जाए। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए रेस्तरां को ग्राहक को 3,000 रुपये मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया गया। यह भी कहा गया कि यदि 30 दिनों के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो उस पर ब्याज लागू होगा।
सुनवाई के दौरान रेस्तरां के वकील ने दलील दी कि रेस्तरां में एसी, बैठने की सुविधा, अच्छा माहौल और सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और इसी प्रीमियम के कारण वस्तुओं की कीमत अधिक होती है। हालांकि, चंडीगढ़ की SCDRC ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि रेस्तरां अपने द्वारा बनाए गए खाने-पीने की चीज़ों की कीमत तय कर सकते हैं लेकिन प्री-पैकेज्ड वस्तुओं के मामले में ऐसा नहीं किया जा सकता। पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर, जिस पर एमआरपी अंकित हो, उसके लिए किसी भी हालत में अधिक कीमत नहीं वसूली जा सकती।