🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, चुनाव आयोग कटघरे में

SIR प्रक्रिया टालने की मांग को लेकर तृणमूल की याचिका, आयोग को एक हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।

By सुप्रकाश मंडल, Posted by: श्वेता सिंह

Jan 13, 2026 11:07 IST

नई दिल्ली: वोटर लिस्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठ रहे कई तरह के सवालों और आरोपों को लेकर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस काफी समय से चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठा रही है। तृणमूल का आरोप है कि चुनाव आयोग अब “व्हाट्सऐप के जरिए” काम कर रहा है। इसी SIR प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से रोकने की मांग करते हुए तृणमूल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक मामला भी दायर किया गया है।

इस मामले में तृणमूल की दलीलें जानने के लिए सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। आयोग ने कोर्ट से हलफनामा दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन अदालत ने वह अनुरोध खारिज करते हुए एक हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस बीच, इसी दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR प्रक्रिया में कई अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को एक और चिट्ठी भेजी। बीते 48 घंटों में यह उनकी दूसरी चिट्ठी है और अब तक कुल मिलाकर ममता बनर्जी पांच बार चुनाव आयोग को पत्र लिख चुकी हैं।

SIR प्रक्रिया में लापरवाही और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ में हुई। डेरेक ओ’ब्रायन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखा।

कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग अपने अधिकांश निर्देश व्हाट्सऐप के माध्यम से जारी कर रहा है, जो किसी संवैधानिक संस्था के काम करने के तरीके के बिल्कुल खिलाफ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं को बिना किसी ठोस वजह के सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। सिब्बल का कहना था कि जिसे “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” बताया जा रहा है, वह असल में पूरी तरह अव्यावहारिक और अतार्किक है।

अदालत सूत्रों के मुताबिक, कपिल सिब्बल की दलीलों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले में जवाब मांगा है और इसी उद्देश्य से आयोग को नोटिस जारी किया गया है। आयोग के वकील ने जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने साफ कहा कि आयोग को इसी सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया कि कई मतदाताओं ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं, इसके बावजूद उनके नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि SIR की सुनवाई के दौरान मतदाताओं से कागजात तो लिए जा रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें कोई रसीद या दस्तावेज नहीं दिया जा रहा।

मुख्यमंत्री का आरोप है कि बाद में चुनाव आयोग की ओर से कहा जा रहा है कि मतदाताओं के कागजात मिले ही नहीं या फिर रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं। इसी बहाने मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जा रहे हैं।

ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में यह भी कहा कि वर्ष 2002 की वोटर लिस्ट को डिजिटाइज करने की प्रक्रिया में भी भारी गलतियां हुई हैं। उनके मुताबिक, 2002 की मतदाता सूची का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अंग्रेजी में अनुवाद किया गया, जिसकी वजह से मतदाताओं के नाम की स्पेलिंग, उम्र, पिता का नाम, पारिवारिक संबंध और यहां तक कि लिंग पहचान में भी गड़बड़ियां हो रही हैं।

मुख्यमंत्री का कहना है कि इन्हीं मतदाताओं के मामलों में चुनाव आयोग “तथ्यगत त्रुटि” या “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” का हवाला देकर नोटिस जारी कर रहा है।

SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखी अपनी पांचवीं चिट्ठी में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बेवजह आम लोगों को परेशान कर रहा है। उन्होंने लिखा कि मामूली स्पेलिंग मिस्टेक के लिए भी मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं। कई मामलों में समस्याएं इतनी छोटी हैं कि उन्हें दफ्तर में बैठकर ही सुधारा जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहले चुनाव आयोग ने दावा किया था कि पुराने वोटर लिस्ट से नाम मेल न खाने पर ही नोटिस जारी किए जाएंगे। लेकिन अब देखा जा रहा है कि जिन मतदाताओं की सारी जानकारी सही है, उन्हें भी नोटिस भेजे जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से अपील की कि लोगों को बेवजह परेशान करना बंद किया जाए, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जाए और वोटर लिस्ट में संशोधन असली मतदाताओं के नाम काटकर न किया जाए।

इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया था कि SIR प्रक्रिया के कारण अब तक 77 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, इस दावे को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने मुख्यमंत्री के आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि ऐसे किसी दावे के समर्थन में कोई भरोसेमंद प्रमाण नहीं है।

मुख्यमंत्री की चिट्ठी को बूथ लेवल ऑफिसरों के संगठन ‘वोटकर्मी–BLO ऐक्य मंच’ ने महत्व देने से इनकार कर दिया है। संगठन ने सोमवार को मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी गई यह चिट्ठी “मगरमच्छ के आंसू” के अलावा कुछ नहीं है। संगठन ने सवाल उठाया कि SIR ड्यूटी के दौरान BLO की मौत और उनके मुआवजे को लेकर कोई रिपोर्ट कहां है। संगठन का आरोप है कि राज्य सरकार ने अब तक BLO के मुआवजे को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।

Prev Article
ऑफिस टाइम में मेट्रो ठप, सुरंग से पैदल बाहर निकाले गए यात्री

Articles you may like: