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ईरान लिंक पड़ा भारी? ट्रंप के टैरिफ से भारत को नुकसान

पिछले कुछ वर्षों में ईरान के साथ भारत के व्यापार की मात्रा में कमी आई है। हालांकि मौजूदा समय में जो व्यापार हो रहा है, वह भी कम नहीं है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक परियोजनाएं भी मौजूद हैं।

By कौशिक भट्टाचार्य, Posted by: प्रियंका कानू

Jan 13, 2026 12:26 IST

नई दिल्ली: ईरान में आंदोलन तेज होता जा रहा है और इसके साथ ही धरपकड़ भी बढ़ रही है। इसी पृष्ठभूमि में सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि जिन देशों के ईरान के साथ व्यापारिक संबंध हैं, उन पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप का मकसद ईरान के सर्वोच्च नेता आयातोल्ला अली खामेनेई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना बताया जा रहा है। भारत के भी ईरान के साथ व्यापारिक संबंध हैं। भले ही यह व्यापार अन्य देशों की तुलना में कम हो लेकिन रणनीतिक रूप से इसका महत्व काफी ज़्यादा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप के इस फैसले का असर भारत पर भी पड़ेगा?

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने लिखा कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करता है, अगर वह अमेरिका के साथ कारोबार करना चाहता है तो उसे 25 प्रतिशत टैरिफ देना होगा। यह आदेश तुरंत लागू होगा और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। इस फैसले पर ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

भारत-ईरान व्यापार का आंकड़ा

ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार चीन है, इसलिए ट्रंप के टैरिफ का सबसे ज़्यादा असर चीन पर पड़ने की संभावना है। लेकिन जानकारों का मानना है कि भारत, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईरान के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (लगभग 14 हज़ार करोड़ रुपये) का रहा। भारत ने 1.24 अरब डॉलर के सामान का निर्यात किया और 0.44 अरब डॉलर का आयात किया।

भारत ईरान से क्या आयात करता है?

भारत ईरान से मुख्य रूप से रासायनिक उत्पाद और फल आयात करता है। तेल और ऊर्जा उत्पादों का आयात फिलहाल बहुत कम है। रासायनिक उत्पाद: लगभग 512.92 मिलियन डॉलर, फल: 311.60 मिलियन डॉलर, ईंधन, तेल और डिस्टिलेशन उत्पाद: 86.48 मिलियन डॉलर। वहीं भारत ईरान को चावल, दवाइयाँ, कॉफी, चाय, मसाले और मशीनरी का निर्यात करता है।

चाबहार बंदरगाह: रणनीतिक महत्व

भले ही व्यापार सीमित हो लेकिन ईरान के साथ भारत की कुछ परियोजनाएँ बेहद अहम हैं। इनमें सबसे प्रमुख है चाबहार बंदरगाह। भारत ने अगले 10 वर्षों के लिए इस बंदरगाह के विकास की ज़िम्मेदारी ली है। यह बंदरगाह पाकिस्तान को बायपास करते हुए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से सीधे जोड़ता है। इसी वजह से इसे मध्य एशिया के लिए भारत का “गेटवे” भी कहा जाता है। ट्रंप के टैरिफ फैसले के बाद चाबहार परियोजना के भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं।

भारत पर संभावित असर

पिछले साल जून में ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसके बाद रूस से तेल खरीदने पर भी भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया। इस तरह भारतीय उत्पादों पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अगर अब ईरान से व्यापार के चलते और टैरिफ लगाया गया, तो भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और लंबे समय से चर्चा में चल रहे व्यापार समझौते पर भी असर पड़ सकता है।

ईरान की मौजूदा स्थिति

28 दिसंबर से ईरान भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं। आर्थिक संकट, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती हालत और अन्य मुद्दों को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं। धीरे-धीरे यह आंदोलन सरकार विरोधी बन गया है। कई सरकारी इमारतों में आगजनी हुई है। जवाब में पुलिस ने सख़्त कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोप भी सुरक्षा बलों पर लगे हैं।

ट्रम्प की चेतावनी

स्थिति बिगड़ने पर ट्रंप ने ईरान पर एयर स्ट्राइक की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान आज़ादी का सपना देख रहा है, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। अमेरिका उनके साथ खड़ा है। इसके जवाब में आयातोल्ला अली खामेनेई ने कहा कि अपने काम से काम रखिए। इन्हीं चेतावनियों और जवाबी चेतावनियों के बीच ट्रंप ने टैरिफ लगाने का फैसला लागू कर दिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई है लेकिन अगर हालात और बिगड़े तो अमेरिका को बड़ा कदम उठाना पड़ सकता है।

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