नयी दिल्लीः वैश्विक अनिश्चितताओं के बढ़ते असर के बीच भारतीय बॉन्ड बाजार को स्थिर रखने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को आने वाले समय में ओपन मार्केट ऑपरेशंस का सहारा और अधिक लेना पड़ सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है कि बॉन्ड कीमतों को नियंत्रण में रखने और सिस्टम में पर्याप्त तरलता बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक को सक्रिय कदम उठाने होंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक जहां 2025 के अंत में भू-राजनीतिक तनावों में कुछ नरमी के संकेत दिखे थे, वहीं 2026 की शुरुआत तेज अस्थिरता के साथ हुई है। वेनेज़ुएला से लेकर ईरान क्षेत्र तक उभरते नए संघर्षों ने ऊर्जा और कमोडिटी बाजारों में अचानक और अप्रत्याशित कीमत उतार-चढ़ाव को जन्म दिया है। यह स्थिति कुछ समय पहले तक जताई जा रही स्थिरता की उम्मीदों के बिल्कुल उलट है।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, SBI की रिपोर्ट में ग्रीनलैंड को वैश्विक ‘रीयलपॉलिटिक’ के लिए संभावित “वॉटरलू” करार दिया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संतुलन की नाजुकता को दर्शाता है। इसके साथ ही अमेरिका में फेडरल रिजर्व के नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता को भी वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए एक बड़ा जोखिम बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फेड चेयर की भूमिका को संस्थागत स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है और इस पर किसी भी तरह का दबाव बाजारों की धारणा को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि 2026 में कीमतों की अस्थिरता इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि बाजार इन वैश्विक घटनाओं पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। इस पृष्ठभूमि में घरेलू वित्तीय प्रणाली में तरलता पर लगातार दबाव बने रहने की आशंका जताई गई है। SBI का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में RBI को रिकॉर्ड स्तर पर OMO ऑपरेशंस जारी रखने पड़ सकते हैं, ताकि सिस्टम में पर्याप्त और टिकाऊ तरलता बनी रहे।
वित्त वर्ष 2026 में अब तक RBI करीब ₹5.16 लाख करोड़ के शुद्ध OMO खरीद ऑपरेशंस कर चुका है। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए SBI का अनुमान है कि वित्त वर्ष के बाकी हिस्से में भी केंद्रीय बैंक को अतिरिक्त OMO खरीद करनी पड़ सकती है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि यह रुझान वित्त वर्ष 2027 तक जारी रह सकता है।