तेल अवीवः गाजा में युद्ध और हिंसा के बाद अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार सीजफायर योजना का दूसरा चरण शुरू हो गया है। इस चरण का मुख्य उद्देश्य हमास के हथियार जमा करना, गाजा के युद्ध-प्रभावित इलाकों का पुनर्निर्माण और टेक्नोक्रेटिक समिति के माध्यम से प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करना है।
विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के अनुसार, यह योजना डोनाल्ड ट्रंप की 20-पॉइंट स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। पहले चरण में हमास ने अधिकांश बंदियों को रिहा किया, जिससे लड़ाई का मुख्य तनाव घटा। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अब दूसरे चरण में तकनीकी समिति का गठन, गाजा में रोजमर्रा के प्रशासन और पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी लेगी।
टेक्नोक्रेटिक समिति और चुनौतियां
समिति का नेतृत्व अली शाथ करेंगे, जो फिलिस्तीनी प्राधिकरण में पूर्व उप-मंत्री और आर्थिक विकास विशेषज्ञ हैं। हालांकि, उनके सामने बड़ी चुनौतियां हैं:
हमास का निरस्त्रीकरण: लगभग दो दशक से गाजा पर हमास का नियंत्रण है। उसका प्रशासनिक और सैन्य नेटवर्क अब तक गहरी जड़ें जमा चुका है।
सार्वजनिक सेवाओं का संचालन: गाजा के 20 लाख से अधिक लोगों के लिए बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुचारू रूप से चलाना आसान नहीं।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा निगरानी: योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती जरूरी है, जो क्षेत्रीय और राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।
वित्तीय संकट: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गाजा का पुनर्निर्माण 50 अरब डॉलर से अधिक में होगा। फिलहाल पर्याप्त वित्तीय मदद का कोई संकेत नहीं है।
राजनीतिक और रणनीतिक असर
इस योजना का सबसे बड़ा राजनीतिक असर हमास और इजराइल के बीच शक्ति संतुलन पर होगा। तकनीकी समिति और अमेरिकी निगरानी से हमास की राजनीतिक ताकत सीमित हो सकती है। वहीं, ट्रंप के नेतृत्व वाले “Board of Peace” के माध्यम से अमेरिका क्षेत्र में अपनी छवि को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सफलता सीधे तौर पर गाजा में स्थायी शांति और पुनर्निर्माण पर निर्भर करेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वित्तीय मदद सही समय पर नहीं मिलती, तो हमास का विरोध और स्थानीय अस्थिरता दोनों ही योजना को असफल कर सकते हैं।
गाजा का दूसरा चरण सीजफायर योजना सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की परीक्षा भी है। टेक्नोक्रेटिक समिति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या अमेरिका और मध्यस्थ देशों के प्रयास वास्तविक शांति और स्थायी पुनर्निर्माण में बदल सकते हैं।