नयी दिल्लीः दक्षिणी इजराइल के नेगेव रेगिस्तान में गुरुवार की सुबह 9 बजे अचानक 4.2 मैग्नीट्यूड का भूकंप महसूस किया गया। सायरन बजने लगे और इलाके में हलचल मच गई। भूकंप का स्रोत इजराइल के टॉप-सीक्रेट डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास था, जिससे अटकलें तेज हो गईं कि क्या यह प्राकृतिक झटका था या कोई गुप्त परमाणु परीक्षण किया गया।
समय और गहराई ने बढ़ाई शक की संभावना
भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया और झटका मात्र 1.5 सेकंड का था। कुछ मिलिट्री विशेषज्ञों का कहना है कि यह लो-यील्ड न्यूक्लियर टेस्ट के दौरान महसूस होने वाले झटकों जैसा है। इस दिन देशभर में स्कूलों में पहले से प्लान की गई इमरजेंसी ड्रिल चल रही थी, जिसने अटकलों को और हवा दे दी।
भारतीय नागरिकों के लिए इमरजेंसी एडवाइजरी
इजराइल में भारतीय एम्बेसी ने उसी दिन भारतीय नागरिकों के लिए इमरजेंसी निर्देश जारी किए। नागरिकों को सतर्क रहने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई। इसके साथ ही 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया गया। हालांकि, यह एडवाइजरी ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर जारी की गई थी। कुछ नेटिज़न्स का मानना है कि नेगेव रेगिस्तान में आए भूकंप ने इस एडवाइज़री में भूमिका निभाई।
इस रहस्यमयी झटके ने एक सवाल और मजबूती से खड़ा कर दिया है -क्या इजराइल इस समय किसी संभावित न्यूक्लियर तनाव की कगार पर है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस घटना ने सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय हलचल के मुद्दों को और गंभीर बना दिया है।