सागरद्वीपः कपिलमुनि बाबा की तपोभूमि गंगासागर में हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर सागर में डुबकी लगाने के लिए न सिर्फ देश के कई हिस्सों से तीर्थयात्री पहुंचते हैं बल्कि विदेशी पर्यटक भी आते हैं। क्यों न हो, अब गंगासागर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि दुनियाभर में एक पहचान बन गयी है। इस बार भी हमें ऐसे कुछ विदेशी तीर्थयात्री देखने को मिले। गुरुवार की सुबह एक ऐसे ही विदेशी श्रद्धालु को देखा गया जो भारतीय आध्यात्म में लीन दिखा। सागर के किनारे बैठकर मानो कुछ कर रहा था। पुण्य स्नान के बाद तट पर पूजा-अर्चना के लिए भगवान शिव की आकृति को उंगलियों से उकेरता देखा गया. उसने हमें बताया कि उसके यहां भगवान शिव और गंगा की पूजा की.पूछने पर से वह अपना नाम निकोल बताया, जो स्वीडन का नागरिक है। उसने बताया कि वह दूसरी बार भारत आया। वह सनातन धर्म में आस्था रखता है। यह आस्था ही उसे यहां खींच लाई है। उसने बताया कि वह अपने भारतीय कुछ मित्रों से गंगासागर के बारे में सुना था। इसके बाद उसके गंगासागर मेले के संबंध जानकारी जुटाई तो वह खुद को रोक नहीं पाया और गंगा सागर मेला पहुंच गया। बताया कि वह पहली बार गंगासागर मेले में आया है। सागर मेले में आने के बाद ईश्वर, सनातन धर्म के प्रति उसकी आस्था बढ़ गई है। उसका यह भी कहना था कि वह 12 जनवरी से ही गंगासागर में है। वह हर दिन सागर में स्नान भी कर रहा है। दो दिन पहले राज्य के मंत्री अरुप विश्वास ने कहा था कि गंगासागर मेले में इस बार ज्यादा विदेशी पर्यटकों का आगमन हुआ है। जिनमें फ्रांस, स्वीडन, यूक्रेन, रूस और नेपाल के लोग शामिल हैं। कई दिनों से सागर के तट पर विदेशी पर्यटकों को पूजा-अर्चना की तस्वीरें खींचते देखा जा रहा था।
तपोभूमि गंगासागर पहुंचा स्वीडन का शख्स, खोया था आध्यात्म की दुनिया में
By सागरद्वीप से लखन भारती
Jan 15, 2026 20:21 IST
सागर के तट पर पूजाृअर्चना करता एक विदेशी शख्स।