सागरद्वीपः गंगासागर मेले को अभी तक राष्ट्रीय मेला घोषित नहीं किया गया है, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार से इसे कुंभ की तरह राष्ट्रीय मर्यादा देने की लगातार मांग कर रही हैं, ताकि पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्रीय मदद मिल सके। कपिलमुनि मंदिर के उत्तराधिकारी संजय दास ने बुधवार को बताया कि यदि गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला घोषित कर दिया गया तो केंद्र से जो फंड आयेगा, उससे सागरद्वीप का विकास होगा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के प्रयास से मुरी गंगा पर सेतू बनने जा रहा है। 5 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इसका शिलान्यास किया। काम शुरु भी हो चुका है। सेतू के बनने पर गंगासागर में न सिर्फ मकर संक्रांति पर भीड़ उमड़ेगी बल्कि सालभर गंगासागर को महत्व बढ़ जायेगा। संजय दास ने बताया कि अभी गंगासागर एक मिनी कुंभ है, सेतू बनने के बाद महाकुंभ का रुप ले लेगा। गंगासागर के पौराणिक महत्व को लेकर संजय दास ने बताया कि गंगासागर का इतिहास पौराणिक कथाओं और धार्मिक महत्व से जुड़ा है, जहाँ गंगा नदी बंगाल की खाड़ी से मिलती है; यह वही स्थान है जहाँ राजा सगर के 60,000 पुत्रों को कपिल मुनि के श्राप से मुक्ति मिली थी, जब राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए और वे यहाँ सागर से मिलीं, जिससे भक्तों को पापों से मुक्ति और मोक्ष मिलता है, खासकर मकर संक्रांति पर आयोजित मेले के दौरान, जिसे "सब तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार" कहा जाता है।
गंगासागर राष्ट्रीय मेला घोषित होने से केंद्र से आएगा फंड, इससे होगा सागरद्वीप का विकासः संजय दास
By सागरद्वीप से लखन भारती
Jan 14, 2026 13:04 IST
कपिलमुनि बाबा के मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटते संजय दास।