नई दिल्ली: चोट की समस्याओं से जूझ रही है भारतीय क्रिकेट टीम। न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज शुरू होने से पहले ही ऋषभ पंत और तिलक वर्मा चोटिल हो गए थे। अब इस सूची में वॉशिंगटन सुंदर का नाम भी जुड़ गया है। न्यूजीलैंड टीम के खिलाफ पहले वनडे में पीठ में खिंचाव के कारण वह बाहर हो गए। इन लगातार चोटों की वजह से टीम इंडिया को आखिरी समय में कई बदलाव करने पड़े। हालांकि भारत ने पहला वनडे जीत लिया लेकिन फिर भी कई सवाल खड़े हुए हैं। इनमें मिडिल ओवर्स में स्पिनरों का असर न दिखा पाना, नई गेंद से विकेट न मिलना और बल्लेबाजी क्रम में अचानक विकेट गिरना शामिल है। इसी कारण मौजूदा वनडे सीरीज के खत्म होते ही भारत अपनी रणनीति में बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ेगा, ऐसा संकेत भारत के बैटिंग कोच ने दिया है।
भारत ने ऐसा फैसला क्यों लिया?
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में देखा गया कि विराट कोहली के आउट होते ही भारतीय पारी में तेजी से गिरावट आई। भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए टीम इंडिया ठोस कदम उठाना चाहती है। हालांकि इस फैसले के पीछे आईसीसी के नए वन-बॉल नियम की भी बड़ी भूमिका है। सीतांशु कोटक का कहना है कि इस नियम के तहत 35 से 50 ओवर के बीच गेंदबाजी करने वाली टीम को किसी एक गेंद को चुनना होगा और बाकी मैच उसी गेंद से खेला जाएगा। इसका असर बल्लेबाजी पर भी पड़ेगा। इसी वजह से बल्लेबाजी की रणनीति में बदलाव जरूरी है।
इस बारे में भारत के बैटिंग कोच ने कहा कि टी-20 और वनडे क्रिकेट में काफी अंतर है। भारत में लगभग हर वनडे मैच में 300 से ज्यादा रन का लक्ष्य पीछा करना पड़ता है। इसके अलावा टी-20 वर्ल्ड कप के बाद और ज्यादा वनडे मैच खेले जाएंगे। इसलिए 34 ओवर के बाद एक ही गेंद से खेलने को लेकर आईसीसी के नए नियम के अनुसार हमें अपनी बल्लेबाज़ी रणनीति बदलनी होगी। पावरप्ले और आखिरी आठ ओवरों के लिए खास योजना बनानी पड़ेगी।