नई दिल्ली : भारतीय टी-20 टीम में विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका को लेकर लंबे समय से प्रयोग चल रहे हैं। मुख्य विकेटकीपर हो या बैक-अप संजू सैमसन ने लगभग हर समय टीम में अपनी जगह बनाए रखी। दूसरे विकेटकीपर के तौर पर कभी जितेश शर्मा को मौका मिला तो कभी ऋषभ पंत को। कुछ मैचों में टीम मैनेजमेंट ने संजू की जगह जितेश को भी प्लेइंग इलेवन में शामिल किया था। इसके बावजूद उन्हें विश्व कप टीम से बाहर कर दिया गया। संजू के साथ टीम में जगह मिली ईशान किशन को। हैरानी की बात यह रही कि यह फैसला जितेश को पहले से बताए बिना लिया गया। इस पूरे मामले का खुलासा 32 वर्षीय विकेटकीपर बल्लेबाज ने खुद किया है।
क्या बोले जितेश?
एक इंटरव्यू में जितेश शर्मा ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें यह तक पता नहीं था कि वे विश्व कप टीम में नहीं हैं। अजीत अगरकर और सूर्यकुमार यादव द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीम घोषित किए जाने के बाद ही उन्हें इस फैसले की जानकारी मिली। हाल के कई सीरीज में भारतीय टीम में लगातार खेलने के बावजूद इस तरह अंधेरे में रखे जाने से क्रिकेट प्रेमी भी हैरान हैं। हालांकि जितेश ने सीधे तौर पर नाराजगी नहीं जताई लेकिन उनके शब्दों से साफ था कि वे भी इस फैसले से चौंक गए थे।
जितेश ने कहा कि स्क्वॉड की घोषणा होने तक मुझे यह पता ही नहीं था कि मैं विश्व कप टीम में नहीं हूं। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में चयनकर्ताओं ने जो कारण बताए उनसे मैं सहमत हूं। उन्होंने तार्किक बातें रखीं। बाद में इस विषय पर कोच और चयनकर्ताओं से अलग से चर्चा भी हुई। वे जो समझाना चाहते थे उसे मैंने अच्छी तरह समझ लिया।
हालांकि क्रिकेट प्रेमियों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि जितेश शर्मा को बाहर किया जाना उचित नहीं था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज में वे भारत के मुख्य विकेटकीपर थे और जब-जब उन्हें मौका मिला उन्होंने भारतीय जर्सी में अपनी क्षमता साबित की। आईपीएल में भी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने सबका ध्यान खींचा लेकिन इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अजीत अगरकर, गौतम गम्भीर और भारतीय टीम मैनेजमेंट के बीच खिलाड़ियों से सही और स्पष्ट संवाद की कमी है।