सागरद्वीपः मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गंगासागर में गुरुवार तड़के से ही श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। देश-दुनिया के कोने-कोने से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा और सागर के संगम पर आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। संगम तट “हर-हर गंगे” और “जय कपिल मुनि” के जयघोष से गूंज उठा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में मां गंगा के स्वर्ग से अवतरण के बाद कपिल मुनि के आश्रम के समीप राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को जिस शुभ मुहूर्त में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी, उसी पावन समय में गंगासागर स्नान की परंपरा चली आ रही है। इस कारण मकर संक्रांति पर यहां स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।
पुण्य स्नान के शुभ मुहूर्त बुधवार की दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से गुरुवार की दोपहर 1 बजकर 19 मिनट तक है जिससे पुण्य स्नान के लिए गुरुवार को भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इसी कारण गुरुवार सुबह मकर संक्रांति का पुण्य स्नान विशेष फलदायी माना जा रहा है। एक जनवरी से 15 जनवरी तक लगभग एक करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अंदेशा लगाया जा रहा है। हालांकि राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान है कि अब तक आंकड़ा एक करोड़ पार हो गया है।
गांव की ओर लौटने रहे हैं श्रद्धालुः
मकर संक्रांति पर गंगासागर में उमड़ा आस्था का सैलाब थम गया। लोग अपने-अपने गांव की ओर लौट रहे हैं। गुरुवार की सुबह से ही सागर बस स्टैंड में भीड़ नजर आयी। बस में चढ़ने का अफरा-तफरी माहौल रहा। हालांकि प्रशासन की ओर से अतिरिक्त बस स्टैंड और बसों के इंतजाम किए गये हैं। समुद्र तट विरान होने लगा है। मेला 17 जनवरी तक चलेगा।