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ईरान में अमेरिकी हमले के डर के कारण लगातार पांचवें दिन तेल की कीमतें बढ़ीं

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के संदेश ने तेल बाजार में अनिश्चितता का स्तर काफी बढ़ा दिया है।

By सुदीप्त बैनर्जी, Posted by : राखी मल्लिक

Jan 15, 2026 15:12 IST

मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव के चलते बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत लगातार पांचवें दिन बढ़ी। ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले और इसके जवाब में पश्चिम एशिया में अमेरिकी हितों पर हमला होने की आशंका के कारण तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, इस डर ने निवेशकों में नई चिंता पैदा कर दी।

इस प्रभाव के चलते, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत इस दिन बारेल प्रति 92 सेंट या 1.4 प्रतिशत बढ़कर 66.39 अमेरिकी डॉलर हो गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत बारेल प्रति 87 सेंट या 1.4 प्रतिशत बढ़कर 62.02 अमेरिकी डॉलर पर पहुँच गई।

ईरान की कड़ी चेतावनी के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। तेहरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि वॉशिंगटन ईरान पर हमला करता है तो पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। इसी कारण कतर में स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने से कुछ कर्मचारियों को हटने की सलाह दी गई है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस तरह के संदेश ने तेल बाजार में अनिश्चितता का स्तर काफी बढ़ा दिया है।

ओनिक्स कैपिटल ग्रुप के प्रबंध निदेशक जॉर्ज मोंतेपे ने कहा कि विश्व इस समय गहरी भू-राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा है। जहां आपूर्ति बाधित होने का पर्याप्त जोखिम है। उनका कहना है कि ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन संभावित रूप से सरकार परिवर्तन की दिशा में बढ़ रहे हैं और अमेरिकी हमले की आशंका ने बाजार की चिंता को और तेज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति को और जटिल बनाया है। मंगलवार को उन्होंने ईरानी जनता से आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया और कहा सहायता आ रही है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह सहायता किस प्रकार की होगी।

सिटी ग्रुप के विश्लेषकों का भी मानना है कि ईरान में विरोध प्रदर्शन से अल्पकाल में तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की संभावना कम है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम के कारण प्रीमियम काफी बढ़ गया है। इसी वजह से उन्होंने अगले तीन महीनों के लिए ब्रेंट क्रूड की संभावित कीमत बारेल प्रति 70 डॉलर तक बढ़ा दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब तक विरोध प्रदर्शन ईरान के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में नहीं फैला है इसलिए वास्तविक आपूर्ति पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।

तेल की कीमतों में इस वृद्धि को आंशिक रूप से अमेरिकी बाजार में स्टॉक की जानकारी ने नियंत्रित किया है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक 5.23 मिलियन बैरल बढ़ा। इसी दौरान पेट्रोल का स्टॉक 8.23 मिलियन बैरल और डिस्टिलेट का स्टॉक 4.34 मिलियन बैरल बढ़ा।

वहीं ओपेक सदस्य वेनेज़ुएला ने अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उत्पादन में जो कटौती की थी उसे धीरे-धीरे हटाना शुरू कर दिया है। सोमवार को दो सुपरटैंकर वेनेज़ुएला की जलसीमा पार कर गए। जिनमें प्रत्येक में लगभग 18 लाख बैरल कच्चा तेल था। माना जा रहा है कि यह वॉशिंगटन और काराकास के बीच 5 करोड़ बैरल की संभावित आपूर्ति समझौते का पहला कंसाइनमेंट हो सकता है।

कुल मिलाकर, ईरान के चारों ओर राजनीतिक अस्थिरता, अमेरिका की स्थिति, स्टॉक स्तर की जानकारी और वेनेज़ुएला—इन सभी कारकों के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। फिलहाल विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम ही तेल की कीमतों की दिशा तय करने में सबसे बड़ा कारक है।

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