नई दिल्ली: सर्दियों के मौसम में जब दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है, उसी समय एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि दिल्ली चिड़ियाघर परिसर में एक सियार (जैकल) को जिंदा जलाकर मार दिया गया। मामला सामने आते ही पर्यावरण और वन मंत्रालय चौकन्ना हो गया और उसने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
इस सनसनीखेज आरोप को सबसे पहले दिल्ली चिड़ियाघर के कर्मचारी यूनियन ने उठाया। यूनियन की ओर से पर्यावरण मंत्रालय को बताया गया कि 22 नवंबर को चिड़ियाघर के एक एनक्लोजर से चार सियार भाग गए थे। इनमें से तीन को पकड़कर सुरक्षित रूप से वापस एनक्लोजर में भेज दिया गया लेकिन एक सियार हिमालयन भालू के एनक्लोजर में कूद पड़ा।
सियार वहां भालू के लिए खोदी गई मिट्टी की सुरंग में घुस गया। कर्मचारियों का आरोप है कि जानवर को बाहर निकालने के दौरान चिड़ियाघर प्रशासन ने कानून और तय नियमों का पालन नहीं किया। कर्मचारियों के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात रेंजर ने एनक्लोजर के अंदर बारूद बिखेरकर आग लगा दी। उनका आरोप है कि सियार को जिंदा जलाकर मारने की योजना पहले से थी। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि दो दिन बाद उन्हें ही एनक्लोजर के भीतर भेजकर सियार का शव बाहर निकलवाया गया।
एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि नियमों के अनुसार शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बजाय, रेंज अधिकारी ने सीधे शव को जला देने का आदेश दे दिया। हालांकि चिड़ियाघर के निदेशक संजित कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। हालांकि शिकायत मिलने के बाद संयुक्त निदेशक को जांच के आदेश दिए गए हैं।
वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने भी इस मामले में जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया है। पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि यह साबित होता है कि सियार को जानबूझकर जलाकर मारा गया है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।