गुवाहाटीः असम के जोरहाट इलाके में एक निजी संस्था मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल बनाना चाहती है। स्थानीय प्रशासन ने पहले इसके लिए अनुमति दी थी, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सेना ने आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत ने समाधान निकालने का निर्देश दिया।
जोरहाट विकास प्राधिकरण ने प्रारंभिक रूप से अस्पताल निर्माण की अनुमति दी थी। हालांकि सेना का कहना है कि सीमा क्षेत्र के पास इस तरह का निर्माण सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। सेना ने यह भी शर्त रखी है कि यदि अस्पताल बनाने की अनुमति दी जाती है, तो उसके चारों ओर 15 फीट से अधिक ऊंची कंक्रीट की सीमा-दीवार होनी चाहिए और अस्पताल की किसी भी इमारत की खिड़कियां सेना कैंप की ओर नहीं होनी चाहिए। सेना ने स्पष्ट किया कि वह अस्पताल निर्माण के खिलाफ नहीं है, क्योंकि आपात स्थितियों में यह उनके कर्मियों के लिए भी उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
समाचार एजेंसियों के अनुसार, इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीशचंद्र शर्मा की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। इसके बाद अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी और निजी अस्पताल की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ दवे को समाधान का रास्ता निकालने का निर्देश दिया। अदालत ने दो सप्ताह के भीतर समाधान सुझाने को कहा है।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने भारत-बांग्लादेश सीमा की स्थिति का उल्लेख करते हुए सुरक्षा पर विशेष जोर देने की बात कही। वहीं सिद्धार्थ दवे ने बताया कि अस्पताल के लिए जोरहाट नगर क्षेत्र में आठ बीघा से अधिक जमीन खरीदी गई है। जोरहाट विकास प्राधिकरण ने 4 मार्च 2022 को निर्माण की अनुमति दी थी, जिसे बाद में सेना की आपत्ति के कारण रद्द कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सेना कैंप के आसपास पहले से बाजार और अन्य निर्माण मौजूद हैं, और प्रस्तावित अस्पताल सेना कैंप से लगभग 70 मीटर की दूरी पर होगा।