मुंबई: महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के लिए मतदान गुरुवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। मतदान में इस्तेमाल की गई स्याही को लेकर विवाद जरूर उठा, लेकिन इसका वोटिंग प्रक्रिया पर कोई खास असर नहीं पड़ा। इन 29 नगर निगमों में सबसे ज़्यादा ध्यान बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर था। एशिया की सबसे अमीर मानी जाने वाले इस निगम का बजट कई छोटे राज्यों के बजट के बराबर है। एग्ज़िट पोल के मुताबिक इस बार बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना गठबंधन के जीतने की संभावना जताई जा रही है।
हालाँकि एग्ज़िट पोल के नतीजे हमेशा सटीक नहीं होते, लेकिन विशेषज्ञ इन्हें जनमत का एक संकेत मानते हैं। इसलिए शुक्रवार को मतगणना से पहले ही इन सर्वेक्षणों के आधार पर राजनीतिक चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं।
गुरुवार सुबह साढ़े सात बजे मतदान शुरू हुआ और शाम साढ़े पाँच बजे तक 29 नगर निगमों में औसतन 46 से 50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, यह जानकारी राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे ने दी।
हालाँकि मतदान शुरू होने के कुछ ही देर बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने नगर निकाय चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मतदाताओं की उंगली पर स्थायी स्याही की जगह मार्कर से निशान लगाया जा रहा है, जिसे सैनिटाइज़र या नेल पॉलिश रिमूवर से आसानी से मिटाया जा सकता है। उद्धव ने आरोप लगाया कि यह सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन और राज्य निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से हो रहा है। इसी तरह के आरोप राज ठाकरे और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी लगाए।
हालाँकि राज्य निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग के अनुसार, 19 और 28 नवंबर 2011 को जारी आदेशों में स्थानीय चुनावों में मार्कर के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। उसी के अनुसार महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में मार्कर का उपयोग किया गया है। आयोग का दावा है कि स्याही और मार्कर बनाने वाली कंपनी एक ही है और मार्कर की स्याही 10–12 सेकंड में सूख जाती है, जिसके बाद उसे मिटाया नहीं जा सकता।
ठाकरे बंधुओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्वाचन आयुक्त वाघमारे ने कहा, “स्याही मिटाने के वीडियो दिखाकर मतदाताओं में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। यह स्वीकार्य नहीं है। अगर कोई सोचता है कि स्याही मिटाकर दोबारा वोट दिया जा सकता है तो वह गलत है। हम इन वीडियो की जाँच कर रहे हैं और यदि झूठा प्रचार पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
इस विवाद के बीच एग्ज़िट पोल चर्चा के केंद्र में हैं। ‘एक्सिस माय इंडिया’, ‘जेवीसी’ और ‘सकाळ पोल’ के सर्वेक्षणों के अनुसार 227 वार्डों वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका में लगभग 138 सीटें भाजपा गठबंधन को मिल सकती हैं। उद्धव और राज ठाकरे का गठबंधन करीब 59 सीटें हासिल कर सकता है, जबकि कांग्रेस को अधिकतम 23 सीटें मिलने का अनुमान है।
सर्वेक्षणों का कहना है कि मराठा और मुस्लिम मतदाता ठाकरे भाइयों की ओर झुके हैं, जबकि उत्तर और दक्षिण भारतीय मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर अधिक है। युवा और महिला मतदाता भी बड़ी संख्या में भाजपा के पक्ष में गए हैं।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था। तब एकनाथ शिंदे शिवसेना से अलग नहीं हुए थे और बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना ने अपना वर्चस्व बनाए रखा था। लेकिन अब शिवसेना दो धड़ों में बंटी हुई है। ऐसे में यह चुनाव उद्धव और राज ठाकरे दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। एग्ज़िट पोल के अनुमान सही साबित होंगे या नतीजे पलट जाएंगे, इस पर सबकी निगाहें आज की मतगणना पर टिकी हैं।