नई दिल्लीः राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को भविष्य की दिशा दिखाते हुए कहा कि अब देश को डिजिटल और सेवा क्षेत्र की उपलब्धियों से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग, प्रोडक्ट इनोवेशन और वैश्विक प्रतिस्पर्धापर अधिक ध्यान देना होगा। स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम के 10 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने इसे भारत की आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशक में भारतीय स्टार्टअप्स ने यह साबित किया है कि वे नवाचार, तकनीक और सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना सकते हैं। अब यही आत्मविश्वास उत्पादन और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण में दिखना चाहिए ताकि भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया के लिए समाधान देने वाला देश बने।
मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्ट इनोवेशन पर नया फोकस
मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में वही देश आगे बढ़ेंगे जो नई तकनीक के साथ मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करेंगे। उन्होंने स्टार्टअप्स से आग्रह किया कि वे ऐसे उत्पाद विकसित करें जो विश्वस्तरीय गुणवत्ता के हों और वैश्विक बाज़ार में भारत की पहचान को और मजबूत करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार नीतिगत सहयोग, संस्थागत समर्थन और निवेश के माहौल के ज़रिये स्टार्टअप्स के हर प्रयास में साथ खड़ी रहेगी।
नियमों में सुधार से नवाचार को मिली रफ्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले जटिल कानून, लंबे अनुमोदन और ‘इंस्पेक्टर राज’ जैसी व्यवस्थाएँ नवाचार की राह में बड़ी बाधा थीं। इन्हें दूर करने के लिए सरकार ने जन विश्वास पहल के तहत 180 से अधिक कानूनी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया। आज स्टार्टअप्स को कई कानूनों में सेल्फ-सर्टिफिकेशन, सरल मर्जर और अधिग्रहण प्रक्रियाएँ तथा कम कानूनी अड़चनें मिल रही हैं, जिससे वे अपना समय मुकदमों में नहीं, बल्कि नवाचार और विस्तार में लगा पा रहे हैं।
जोखिम उठाने की संस्कृति बनी नई पहचान
प्रधानमंत्री ने कहा कि जोखिम उठाना किसी भी उद्यमी समाज की पहचान होता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे हमेशा ऐसे फैसले लेने के पक्षधर रहे हैं, जिनसे देश को दीर्घकालिक लाभ मिले, भले ही उनमें जोखिम हो। उन्होंने कहा कि पहले जोखिम से बचने की प्रवृत्ति थी, लेकिन आज जोखिम उठाना सम्मान और स्वीकार्यता का विषय बन चुका है। जो लोग केवल मासिक वेतन तक सीमित सोच से आगे बढ़कर नए विचारों पर काम कर रहे हैं, वे आज समाज में प्रेरणा बन रहे हैं।
स्टार्टअप इंडिया: एक ‘रेनबो विज़न’
पीएम मोदी ने स्टार्टअप इंडिया को केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक ‘रेनबो विज़न’ बताया, जो अलग-अलग क्षेत्रों, उद्योगों और प्रतिभाओं को नए अवसरों से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि उनके लिए स्टार्टअप्स की संख्या से ज़्यादा उनका आत्मविश्वास, सोच और प्रभाव मायने रखता है। यह कार्यक्रम बड़े शहरों तक सीमित न रहकर अब टियर-2 और टियर-3 शहरों तक फैल चुका है, जिससे देश के युवाओं को अपने ही क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता के अवसर मिल रहे हैं।
महिलाओं की भागीदारी से मजबूत हुआ इकोसिस्टम
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप्स में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भारत की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आज 45 प्रतिशत से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है। महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप फंडिंग के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुका है। यह समावेशी विकास देश की आर्थिक क्षमता को और मजबूत कर रहा है।
युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप आंदोलन ने भारत को जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर की ओर बढ़ने का रास्ता दिखाया है। आज देश के युवा केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नए अवसर पैदा करने वाले बन रहे हैं।
आँकड़ों में दिखती सफलता की कहानी
स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को हुई थी। उस समय देश में 500 से भी कम स्टार्टअप्स थे, जबकि आज यह संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। 2014 में जहाँ भारत में केवल 4 यूनिकॉर्न थे, वहीं आज लगभग 125 सक्रिय यूनिकॉर्न हैं। वर्ष 2025 में ही करीब 44,000 नए स्टार्टअप पंजीकृत हुए, जो रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप संस्थापकों और हितधारकों से संवाद किया, जहाँ उद्यमियों ने अपनी चुनौतियाँ, जोखिम और सफलताओं के अनुभव साझा किए।