लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बदायूं में नीलकंठ महादेव मंदिर बनाम शम्सी जामा मस्जिद विवाद की सुनवाई 12 फरवरी को तय की गई है। यह मामला अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सुमन तिवारी की अदालत को फिर से सौंपा गया है। एक वकील ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। वकील अरविंद सिंह परमार ने बताया कि जज तिवारी के मातृत्व अवकाश पर जाने के बाद यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज पुष्पेंद्र चौधरी को स्थानांतरित कर दिया गया था। अब उनके लौटने पर केस दोबारा उनकी अदालत में भेज दिया गया है।
परमार के अनुसार, अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी, जिसमें अदालत यह तय करेगी कि अधीनस्थ अदालत को इस तरह के मुकदमे की सुनवाई का अधिकार है या नहीं। यह विवाद वर्ष 2022 से जुड़ा है, जब अखिल भारत हिंदू महासभा के तत्कालीन संयोजक मुकेश पटेल ने दावा किया था कि शम्सी जामा मस्जिद स्थल पर नीलकंठ महादेव मंदिर मौजूद था और उन्होंने परिसर के भीतर पूजा की अनुमति मांगी थी।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, शम्सी जामा मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से पेश हुए वकील अनवर आलम ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ऐसे मामलों की सुनवाई से अधीनस्थ अदालतों को रोकते हैं, इसलिए यह मामला खारिज किया जाना चाहिए। हिंदू पक्ष का कहना है कि शीर्ष अदालत के आदेश लंबित या पहले से दर्ज मामलों पर लागू नहीं होते और इस मामले की सुनवाई उसके गुण-दोष के आधार पर होनी चाहिए।
अनवर आलम ने यह भी बताया कि मस्जिद प्रबंधन समिति ने उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए आवेदन दाखिल किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही देश की सभी अदालतों को निर्देश दे चुका है कि जहां 1991 का कानून लागू होता है, वहां कोई आदेश पारित न किया जाए।