प्रयागराजः माघ मेले के दौरान मकर संक्रांति पर्व से पहले ही प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। मंगलवार आधी रात से शुरू हुए पवित्र स्नान में बुधवार शाम तक 85 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। प्रशासन का अनुमान है कि मकर संक्रांति के मुख्य स्नान पर्व पर यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी।
प्रयागराज मंडल की आयुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि स्नान का सिलसिला मंगलवार रात 12 बजे से शुरू हुआ था और बुधवार शाम तक लाखों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा, जो इस वर्ष माघ मेले का दूसरा प्रमुख स्नान पर्व है।
तड़के से ही घाटों पर भीड़
माघ मेला के पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय के अनुसार, श्रद्धालुओं का आगमन तड़के से ही शुरू हो गया था। सुबह 6 बजे तक करीब 9 लाख से अधिक लोग गंगा और संगम में स्नान कर चुके थे। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति के दिन स्नान करने वालों की संख्या एक करोड़ से डेढ़ करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, मेला परिसर और आसपास के इलाकों में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
स्नान घाट, पार्किंग और जलस्तर पर विशेष ध्यान
माघ मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि इस वर्ष भीड़ प्रबंधन के लिए 42 अस्थायी पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, जिनमें एक लाख से अधिक वाहनों को खड़ा करने की क्षमता है। इसके अलावा कई नए स्नान घाट तैयार किए गए हैं, जहां कपड़े बदलने और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
उन्होंने बताया कि मेले के दौरान गंगा में पर्याप्त जलस्तर बनाए रखने के लिए कानपुर स्थित गंगा बैराज से प्रतिदिन 8,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
44 दिनों तक चलेगा माघ मेला
माघ मेला एक 44 दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन है, जो हर साल हिंदू पंचांग के माघ मास (जनवरी-फरवरी) में आयोजित होता है। माघ मेला प्रयागराज 2026 का आयोजन 3 जनवरी से 15 फरवरी तक किया जा रहा है। इस दौरान कल्पवास, पंचकोसी परिक्रमा जैसी प्राचीन परंपराएं निभाई जाती हैं।
इस माघ मेले के प्रमुख स्नान पर्वों में 15 जनवरी (मकर संक्रांति), 18 जनवरी (मौनी अमावस्या), 23 जनवरी (वसंत पंचमी), 1 फरवरी (माघी पूर्णिमा) और 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) शामिल हैं।