इंदौर: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर में भगीरथपुरा क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता से हुई मौतों के मामले को लेकर सरकार की लापरवाही पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “साफ पानी जनता का अधिकार है” और सरकार इस जिम्मेदारी को निभाने में विफल रही है।
राहुल गांधी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर मरीजों और उनके परिवारों से मिलकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा, “इंदौर नया स्मार्ट सिटी मॉडल है, लेकिन यहां लोग साफ पानी तक नहीं पा रहे हैं। लोगों को धमकाया जा रहा है।”
सीएम के दौरे के दौरान गांधी कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद जितु पटवारी तथा विधानसभा में विपक्षी नेता उमंग सिंघार के साथ चार मरीजों से मिले, उनकी सेहत के बारे में पूछा और परिवारों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने भगीरथपुरा क्षेत्र का दौरा किया और मृतकों के परिवारों से संवेदना व्यक्त की।
गांधी ने मीडिया से कहा, “सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराए और प्रदूषण को कम करे। लेकिन सरकार यह जिम्मेदारी निभा नहीं रही है। इंदौर में लोग दूषित पानी पीकर मर रहे हैं। ऐसे हालात में सरकार को पूरी मदद और उचित मुआवजा देना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि किसी न किसी को सरकार में इस जल त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा, “लोग पीड़ित हैं, परिवार टूट रहे हैं, लेकिन बीजेपी नेता सिर्फ जिम्मेदारी टालने में लगे हैं। यह रवैया असंवेदनशील है और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम भगीरथपुरा के लोगों के साथ हैं और अपराधियों को सजा दिलाने तथा पीड़ितों के न्याय के लिए लड़ते रहेंगे।”
राहुल गांधी ने भगीरथपुरा में मौजूद एक बड़े सरकारी जल टैंक की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह टैंक आज भी साफ पानी नहीं देता। मीडिया के दबाव में सिर्फ तात्कालिक सुधार किया गया है, जो थोड़े समय में फिर वैसा ही हो जाएगा। पीड़ित चाहते हैं कि सरकार स्थायी रूप से साफ पानी की व्यवस्था करे।”
गांधी ने भाजपा के राजनीतिक आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा, “मैं विपक्ष का नेता हूं। लोगों की मौत दूषित पानी के कारण हुई है, मैं उनका मुद्दा उठाने और मदद करने आया हूं। इसे राजनीति कहना मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
उन्होंने मृतकों गीता ध्रुवकर (64) और जीवनलाल बरेडे (80) के परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त की। कांग्रेस नेताओं ने उनकी मौजूदगी में 16 प्रभावित परिवारों को 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी, जबकि उमंग सिंघार ने 50,000 रुपए का मुआवजा प्रदान किया।
स्थानीय निवासियों का दावा है कि पिछले महीने भगीरथपुरा में शुरू हुई उल्टी और दस्त की बीमारी से अब तक 24 लोग मारे गए। राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में रिपोर्ट में मृतकों की संख्या सात बताई है, जिनमें पांच महीने का शिशु भी शामिल है। वहीं, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की ‘डैथ ऑडिट’ रिपोर्ट में 15 मौतों को इस बीमारी से जोड़ा गया है। प्रशासन ने 21 परिवारों को 2 लाख रुपए का मुआवजा भी दिया है।