बर्न : वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट 2026 के मुताबिक दुनिया अब एक नए दौर में पहुंच गई है, जिसे ‘प्रतिस्पर्धा का युग’ कहा गया है। इस दौर में देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, समाज में बंटवारा बढ़ रहा है और तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है।
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक हालात में अनिश्चितता अब सामान्य बात बन गई है। सर्वे में शामिल करीब आधे विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो साल दुनिया के लिए अशांत रहेंगे। युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध और राजनीतिक दबाव समाजों को बांट रहे हैं और व्यापार, पैसा व तकनीक को ताकत दिखाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
WEF ने 2026 के लिए भू-आर्थिक टकराव को सबसे बड़ा तात्कालिक वैश्विक खतरा बताया है। लगभग 18 प्रतिशत विशेषज्ञों ने इसे सबसे गंभीर जोखिम माना है, जो सशस्त्र संघर्ष से भी बड़ा खतरा बन सकता है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की कमजोर होती भूमिका, बढ़ते प्रतिबंध, टैरिफ, निवेश पर रोक और सप्लाई चेन में रुकावटें बताई गई हैं।
आर्थिक मोर्चे पर भी चिंताएं बढ़ी हैं। मंदी, महंगाई और एसेट बबल को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, लेकिन WEF का कहना है कि ऊंचा कर्ज और अस्थिर बाजार अब भी जोखिम पैदा कर रहे हैं।
सामाजिक स्तर पर असमानता लगातार दूसरे साल सबसे जुड़ा हुआ वैश्विक खतरा बनी हुई है। इससे लोगों का संस्थाओं पर भरोसा घट रहा है और राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। तकनीकी क्षेत्र में गलत सूचना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े खतरे तेजी से सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि AI को सही तरीके से नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका असर रोजगार, सूचनाओं की विश्वसनीयता और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
लंबे समय के जोखिमों में पर्यावरणीय संकट सबसे गंभीर बने हुए हैं। चरम मौसम की घटनाएं, जैव विविधता का नुकसान और पृथ्वी की प्राकृतिक प्रणालियों में बदलाव भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बताए गए हैं।
इसी बीच, WEF की 56वीं वार्षिक बैठक ‘डावोस 2026’ 19 से 23 जनवरी तक आयोजित होगी। इस बैठक का विषय ‘A Spirit of Dialogue’ रखा गया है, जिसका मकसद वैश्विक सहयोग बढ़ाना, आपसी भरोसा कायम करना और साझा समाधान तलाशना है।
इस बैठक में 130 से अधिक देशों के लगभग 3,000 नेता भाग लेंगे। इनमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख, करीब 1,700 कारोबारी नेता और दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों के CEO शामिल होंगे। 200 से अधिक सत्रों का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा। WEF का कहना है कि भविष्य पहले से तय नहीं है और आज लिए गए फैसले ही आने वाले समय की दिशा तय करेंगे।