नई दिल्लीः भारत का परिधान खुदरा बाजार आने वाले वर्षों में तेज विस्तार के लिए तैयार है। CareEdge रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2029-30 तक देश का परिधान बाजार लगभग 16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती आय, तेजी से बढ़ता डिजिटलाइजेशन, वैल्यू फैशन की मांग और ई-कॉमर्स का मजबूत विस्तार इस वृद्धि के प्रमुख कारण होंगे।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में भारत के परिधान खुदरा बाजार का आकार करीब 9.30 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो 2017-18 से लगभग 7 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है।
वर्तमान में संगठित रिटेल कुल परिधान बाजार का लगभग 41 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इस सेगमेंट में 10 से 13 प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावना जताई गई है। ब्रांडेड कपड़ों की बढ़ती मांग, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों की भारत में एंट्री और संगठित रिटेल फॉर्मैट का विस्तार इसके मुख्य कारण हैं।
रिपोर्ट में वैल्यू फैशन सेगमेंट को इस वृद्धि का अहम चालक बताया गया है। बढ़ती ब्रांड जागरूकता और कीमत के प्रति संवेदनशील उपभोक्ताओं के चलते यह सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है। 2023-24 में वैल्यू फैशन बाजार का आकार लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये था, जो 2029-30 तक बढ़कर करीब 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
Zudio, Max Fashion और रिलायंस का Yousta जैसे रिटेलर्स अपने स्टोर नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहे हैं, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जो अब परिधान खपत के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।
ई-कॉमर्स भी परिधान खुदरा बाजार का एक बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है। फिलहाल ऑनलाइन चैनल संगठित परिधान रिटेल का करीब 22 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जो 2029-30 तक बढ़कर लगभग 25 प्रतिशत हो सकता है। उस समय ई-कॉमर्स से जुड़े परिधान बाजार का आकार करीब 5 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इंटरनेट की बढ़ती पहुंच, स्मार्टफोन उपयोग में इजाफा और जेनरेशन-Z के फैशन ट्रेंड्स ने डिजिटल-फर्स्ट और ऑम्नी-चैनल रिटेल रणनीतियों को बढ़ावा दिया है।
हालांकि 2024-25 में महंगाई और खराब मौसम के कारण मांग पर कुछ दबाव देखा गया, लेकिन साल के अंत में त्योहारों और शादियों के मौसम के दौरान बाजार में सुधार के संकेत मिले। स्टोरों की संख्या बढ़ने, ऑनलाइन प्रमोशनल सेल और बेहतर उपभोक्ता भावना से बिक्री की रफ्तार फिर तेज हुई।
CareEdge रेटिंग्स ने यह भी कहा है कि हालिया GST बदलाव वैल्यू सेगमेंट के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 2,500 रुपये से कम कीमत वाले परिधानों पर 5 प्रतिशत की कम GST दर से किफायती कीमत और बिक्री मात्रा बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, प्रीमियम कपड़ों पर अधिक GST दर उपभोक्ताओं को सस्ते विकल्पों की ओर मोड़ सकती है, जिससे वैल्यू फैशन की मांग और मजबूत होने की संभावना है।