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1 जून से लागू होगा भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता, व्यापार और सेवाओं को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

11.18 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी और मध्य-पूर्व और अफ्रीका के बाजारों तक भारत की पहुंच और मजबूत होगी।

By डॉ. अभिज्ञात

May 31, 2026 16:42 IST

नई दिल्लीः भारत और ओमान के बीच हुआ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) 1 जून से प्रभावी हो जाएगा। दोनों देश सोमवार को इसकी औपचारिक घोषणा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लागू होने वाला यह पांचवां मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) होगा। इससे पहले भारत मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है। इसके अलावा ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ भी समझौते हो चुके हैं, जबकि यूरोपीय संघ के साथ वार्ता पूरी होने की घोषणा की जा चुकी है।

भारतीय निर्यातकों को मिलेगा शुल्क-मुक्त बाजार

इस समझौते के तहत भारत को ओमान के बाजार में अपने 99.38 प्रतिशत व्यापार मूल्य और 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शत-प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। वर्तमान में भारत के लगभग 3.64 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के जिन उत्पादों पर 5 प्रतिशत शुल्क लगता है, वे अब शुल्क-मुक्त हो जाएंगे। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और वस्त्र, कृषि उत्पाद, परिवहन उपकरण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, रत्न एवं आभूषण सहित कई क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। समझौते के लागू होते ही सभी शून्य-शुल्क रियायतें पहले दिन से प्रभावी हो जाएंगी।

उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर

ओमान ने लौह एवं इस्पात, विद्युत मशीनरी, समुद्री उत्पाद, औद्योगिक मशीनरी, तांबा उत्पाद, दवाइयों और टीकों सहित कई भारतीय क्षेत्रों को शुल्क-मुक्त पहुंच देने पर सहमति जताई है। वहीं खनिज, रसायन, मशीनरी, प्लास्टिक, रबर, ऑटोमोबाइल, कांच, सिरेमिक, संगमरमर और कागज जैसे क्षेत्रों के लिए भी नए निर्यात अवसर पैदा होंगे।

सेवा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

सेवा क्षेत्र में भी यह समझौता भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2024 में ओमान का कुल सेवा आयात 12.52 अरब अमेरिकी डॉलर था, जिसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 5.31 प्रतिशत रही। समझौते के तहत भारतीय कंपनियों को अधिक प्रबंधकीय और विशेषज्ञ कर्मचारियों की तैनाती की सुविधा मिलेगी। पहली बार ओमान ने लेखा, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, निर्माण और परामर्श सेवाओं से जुड़े पेशेवरों के लिए विशेष प्रावधान स्वीकार किए हैं।

कृषि और खाद्य उत्पादों को मिलेगा लाभ

कृषि क्षेत्र को भी उल्लेखनीय लाभ मिलने की उम्मीद है। प्राकृतिक शहद, काजू, आलू, बोनलेस मांस और बेकरी उत्पादों को ओमान में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। इसके अलावा पनीर, दही, दूध, क्रीम, जमे हुए मछली उत्पाद, मक्खन, मांस, चॉकलेट, कन्फेक्शनरी, मिनरल वाटर और खाद्य तेलों जैसे उत्पादों पर भी ओमान शुल्क हटाएगा। वर्तमान में इन पर 5 से 100 प्रतिशत तक शुल्क लगता है।

भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ती खजूर मिलने की संभावना

दूसरी ओर भारतीय उपभोक्ताओं को ओमान से आने वाली खजूर सस्ती मिल सकती है क्योंकि भारत ने प्रतिवर्ष 2,000 टन खजूर के लिए शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। भारत ने ओमान के पारंपरिक उत्पाद गम अरेबिक और फ्रेंकिंसेंस को भी रियायतें देने पर सहमति व्यक्त की है।

संवेदनशील क्षेत्रों को रखा गया समझौते से बाहर

घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए भारत ने 2,789 टैरिफ लाइनों को समझौते से बाहर रखा है। इनमें परिवहन उपकरण, प्रमुख रसायन, अनाज, फल-सब्जियां, मसाले, चाय, कॉफी, डेयरी उत्पाद, मांस, खाद्य तेल, चीनी तथा रबर, चमड़ा, वस्त्र, फुटवियर और पेट्रोलियम आधारित उत्पाद जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं।

ओमान को भी मिलेगी टैरिफ रियायत

ओमान को भी भारत की ओर से 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क रियायतें मिलेंगी, जो भारत के कुल आयात मूल्य के 94.81 प्रतिशत हिस्से को कवर करती हैं। खजूर, संगमरमर और पेट्रोकेमिकल उत्पादों जैसे ओमान के प्रमुख निर्यात उत्पादों के लिए टैरिफ-रेट कोटा आधारित रियायतें दी गई हैं।

भारत-ओमान व्यापार में लगातार बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 11.18 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 10.61 अरब डॉलर था। इसमें भारत का निर्यात 4.02 अरब डॉलर और आयात 7.16 अरब डॉलर रहा। वहीं भारत से ओमान को सेवाओं का निर्यात 2020 के 39.7 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2024 में 66.5 करोड़ डॉलर हो गया।

रणनीतिक साझेदारी भी होगी मजबूत

रणनीतिक दृष्टि से भी ओमान भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार है। यह देश होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो वैश्विक तेल व्यापार का प्रमुख समुद्री मार्ग माना जाता है। ओमान मध्य-पूर्व और अफ्रीका के बाजारों तक भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की पहुंच का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार भी है। ओमान में लगभग सात लाख भारतीय रहते हैं और वहां से भारत को प्रतिवर्ष करीब दो अरब अमेरिकी डॉलर का प्रेषण प्राप्त होता है।

निवेश और कारोबारी उपस्थिति में भी मजबूती

भारतीय कंपनियों की भी ओमान में मजबूत उपस्थिति है, जहां छह हजार से अधिक भारतीय प्रतिष्ठान विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच भारत को ओमान से 61.55 करोड़ अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि 2006 में अमेरिका के साथ समझौते के बाद यह ओमान का किसी देश के साथ पहला द्विपक्षीय व्यापार समझौता है।

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