कोलकाता के सॉल्टलेक में स्वर्ण व्यवसायी के अपहरण व हत्या के मामले के मुख्य आरोपी सस्पेंडेड बीडीओ प्रशांत बर्मन को पिछले करीब डेढ़ महीने से पुलिस से छिपते फिर रहे हैं। रक्षाकवच को खारिज कर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था लेकिन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन किया। ऐसी स्थिति में शनिवार को अचानक प्रशांत बर्मन अपने राजगंज के पुराने ऑफिस में नीली बत्ती वाली गाड़ी में हुटर बजाकर पहुंचे। सवाल उठ रहा है कि ऐसा कैसे संभव है?
बताया जाता है कि दोपहर करीब 12 और 2 बजे, दो बार वह राजगंज के बीडीओर ऑफिस में नीली बत्ती वाली गाड़ी में पहुंचे। लेकिन वह ऑफिस में क्यों आए थे, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। गत नवंबर में कोलकाता के स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या के अपहरण और हत्या के मामले में बीडीओर प्रशांत बर्मन को मुख्य आरोपी बनाया गया है। अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने बारासात में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था जिसे स्वीकार भी कर लिया गया।
पुलिस ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में आवेदन किया तब उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया और उनसे अदालत में आत्मसमर्पण का आदेश दिया गया। इसके बाद सस्पेंडेड बीडीओ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सुप्रीम कोर्ट ने 26 जनवरी को उनके आत्मसमर्पण की तारीख भी तय कर दी थी। इसके बावजूद उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण नहीं किया।
पिछले डेढ़ महीने से 'फरार' चल रहे प्रशांत बर्मन शनिवार को अचानक अपने पुराने ऑफिस पहुंचे जिससे एक बार फिर से विवाद पैदा हो गया है। वह मजिस्ट्रेट लिखी नीली बत्ती वाली गाड़ी में अपने ऑफिस पहुंचे। उक्त ऑफिस के एक कर्मचारी ने बताया कि वह अपने पुराने अंदाज में ही नजर आएं। ऑफिस में प्रवेश कर उन्होंने सबका हालचाल पूछा लेकिन अपने पुराने चेम्बर में वह नहीं गए। थोड़ी देर बाद वह ऑफिस से बाहर निकल गए।
जाते-जाते उन्होंने कहा कि शाम को वह फिर से आएंगे। हालांकि वह फिर से आए थे या नहीं, इस बारे में उक्त कर्मचारी को पता नहीं है। इस मामले में पुलिस का कोई बयान नहीं मिल सका है। राजगंज थाना की ओर से बताया गया कि प्रशांत अपने पुराने ऑफिस आए थे, इस मामले में उनके पास कोई जानकारी नहीं है।