कोलकाताः भारतीय भाषा परिषद, भाषा संस्कृति सेतु एवं बंगीय हिन्दी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की विचार धारा पर भारतीय भाषा परिषद के सभागार में एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक–वैचारिक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विरासत तथा भाषायी विविधता में निहित एकता को सुदृढ़ रूप में प्रस्तुत करना तथा राष्ट्रभाव को सशक्त करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. सोमा बन्धोपाध्याय(कुलपति,बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय), प्रधान अतिथि डॉ. प्रबीर मुखोपाध्याय(पूर्व अध्यक्ष, दामोदर वैली कॉरपोरेशन), विशिष्ट अतिथि अभिनेत्री उमा झुनझुनवाला, भारतीय भाषा परिषद के निदेशक प्रो. शंभूनाथ, परिषद की संरक्षक विमला पोद्दार, आशीष झुनझुनवाला, घनश्याम शुक्ला तथा भाषा संस्कृति सेतु की अध्यक्ष एवं आयोजन संयोजक डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
तत्पश्चात पूर्णश्री रॉय घोष के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना की शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति ने समस्त वातावरण को भक्तिमय एवं सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण कर दिया। स्वागत वक्तव्य भारतीय भाषा परिषद की संरक्षक विमला पोद्दार ने प्रस्तुत किया, जबकि आयोजन की भावभूमि डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव द्वारा श्रोताओं के समक्ष रखी गई।
इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रधान वक्ता प्रो. हितेन्द्र पटेल (रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय) ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन, विचारधारा एवं उनके शोधपरक कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए यह प्रतिपादित किया कि यद्यपि नेताजी की वैचारिक धारा भिन्न थी, तथापि वे महात्मा गांधी के विरोधी नहीं थे। डॉ. सत्य प्रकाश दुबे एवं डॉ. सुरेश चौधरी ने नेताजी की राष्ट्रवादी चेतना, साहस और त्याग पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के दौरान “भाषा संस्कृति सेतु सम्मान” एवं “भाषा संवर्धन सम्मान” के अंतर्गत साहित्य, शिक्षा, संस्कृति एवं सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली अनेक विभूतियों, संस्थाओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। “भाषा संस्कृति सेतु सम्मान” से डॉ. विजय कुमार भारती, डा० प्रबीर मुखोपाध्याय, राजेन्द्र केडिया, डॉ. सुरेश चौधरी, श्रीमती उमा झुनझुनवाला, प्रो. शंभूनाथ, विश्वंभर नेवर सहित सात विशिष्ट व्यक्तित्वों को विभूषित किया गया।
साथ ही रचनाकार, कल्पतरु, राष्ट्रीय कवि संगम, पश्चिम बंग हिन्दी अकादमी, महा ऑल इंडिया मारवाड़ी फेडरेशन,हिन्दी साहित्य अकादमी, हिन्दी साहित्य परिषद, नव सृजन-एक नई सोच, मॉ ओं फाउंडेशन, भोजपुरी साहित्य एवं संस्कृति संस्था तथा अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था को “भाषा संवर्धन सम्मान” प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त कोलकाता में भाषा एवं संस्कृति संवर्धन में कार्य करने वाली प्रमुख विभूतियों को भी 'भाषा संवर्धन सम्मान' से विभूषित किया गया है l इनमें, राघव शरण शर्मा, डॉ सुमिता चट्टोराज, बेबी कारफार्मा, किशन किल्ला, सुश्री शुभ स्वपन, सुचेतना डे, पृथा चटर्जी, देवश्री दत्ता, अनित पाल, विजय लक्ष्मी, सुधा मिश्रा द्विवेदी, वी. अरुणा एवं अन्य बहुत से विभूतियां थी।
सांस्कृतिक सत्र में नंदू बिहारी मिश्र द्वारा प्रस्तुत वीर रस की कविता ने श्रोताओं में ओज एवं उत्साह का संचार किया। आलोक चौधरी द्वारा रचित गीत “एक सुभाष कहीं से ला दो” का भावपूर्ण गायन तथा डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव द्वारा लिखित देशगीत “मेरी शान तिरंगा है” की सामूहिक प्रस्तुति ने समस्त सभागार को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया।
कार्यक्रम में विभिन्न मीडिया प्रतिनिधियों को भी भाषा संवर्धन सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर एजीसी फैसिलिटी मैनेजमेंट के अध्यक्ष हरेंद्र नाथ विश्वास(रतन विश्वास) की कम्पनी द्वारा सभी को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्रसेवा का संदेश दिया गया।
इस पुनीत कार्य के माध्यम से उन्होंने ‘भाषा संस्कृति सेतु’ के साथ अपने संबंध को प्रकृति, संस्कृति और समाज सेवा से सुदृढ़ किया।
संगोष्ठी के समापन अवसर पर भारतीय भाषा परिषद के निदेशक प्रो. शंभूनाथ ने भाषा संस्कृति सेतु की भावी गतिविधियों के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
आयोजन संयोजक डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, सम्मानित विभूतियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से प्रो. शंभूनाथ एवं विमला पोद्दार के सहयोग हेतु कृतज्ञता प्रकट की।
अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया। यह आयोजन भारतीय भाषाओं, संस्कृति तथा राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी एवं स्मरणीय प्रयास सिद्ध हुआ।