कोलकाताः छठी बार SIR को लेकर एक समूह शिकायतें उठाते हुए देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पत्र लिखा। दिल्ली के निर्वाचन सदन में आयोग के फुल बेंच के साथ बैठक के ठीक दो दिन पहले ममता ने लिखा यह पत्र। राज्य की मतदाता सूची की गहन जांच प्रक्रिया में 8,100 माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने से लेकर राज्य-आधारित SIR के अलग नियम लागू करने के विषय में तीन पन्नों के पत्र में मुख्यमंत्री ने आपत्ति जताई। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 20 नवंबर, 2 दिसंबर, 4 जनवरी, 6 जनवरी और 12 जनवरी को भी उन्होंने ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा था।
पत्र में ममता लिखती हैं, 'यह पहली बार है कि देश के चुनावी इतिहास में पश्चिम बंगाल में लगभग 8,100 माइक्रो ऑब्ज़र्वर तैनात किए गए हैं। इनमें से किसी को भी उपयुक्त प्रशिक्षण नहीं मिला है और मतदाता सूची संशोधन जैसी संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रक्रिया में उनकी भूमिका का कोई कानूनी आधार नहीं है।' उनका आरोप है कि प्रतिनिधित्व कानून, 1950 या रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 — किसी भी कानून में माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों को ऐसी शक्तियाँ देने की बात नहीं कही गई है।
यहाँ इसका अंत नहीं है, त्रिपुरा कैडर के चार IAS अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में क्यों नियुक्त किया गया, इस पर भी मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया। उनका आरोप है कि कुछ पर्यवेक्षक कथित तौर पर पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से आयोग के पोर्टल का नियंत्रण ले रहे हैं और बिना किसी कानूनी शक्ति के सूचनाएँ बदल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हट सकते हैं, ऐसी आशंका भी ममता ने व्यक्त की।
पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप में SIR का काम चल रहा है। ममता का सवाल है, पूरे देश में वही कानून और नियम होने के बावजूद सिर्फ पश्चिम बंगाल में अलग प्रक्रिया क्यों लागू की जा रही है ? सुनवाई का प्रकार, दस्तावेज़ की स्वीकार्यता, तर्कसंगत असंगति के मामले की निपटान—सभी मामलों में अन्य राज्यों की तुलना में भिन्न नियम चल रहे हैं, ऐसा उन्होंने दावा किया है।
उल्लेखनीय है कि, पिछले 31 दिसंबर को सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की एक प्रतिनिधि टीम ज्ञानेश कुमार-सहित आयोग की पूरी बेंच के साथ बैठक की थी। इसके बाद, आने वाले 2 फरवरी को खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आयोग की पूरी बेंच के सामने होने वाली हैं। बताया जाता है कि वहां SIR के कारण प्रभावित परिवारों के सदस्यों को भी ले जाया जाएगा। उस बैठक से पहले ही मुख्यमंत्री ने आयोग के खिलाफ हमला तेज कर दिया था, ऐसा राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है।