कोलकाता : आखिरकार निपा में दोहरी राहत! रोगमुक्ति के साथ-साथ संक्रमण का जोखिम कम होने का विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का आश्वासन भी मिला।
नए साल के दूसरे सप्ताह में ही बंगाल में घातक निपा वायरस ने दस्तक दे दी थी। उत्तर 24 परगना से एक पुरुष नर्स और एक सिस्टर नर्स के संक्रमित होने की खबर से पूरे देश में संक्रमण का भय फैल गया था। हालांकि आज अस्पताल से निपा से संक्रमित पुरुष नर्स को छुट्टी मिल गई। संक्रमित सिस्टर नर्स की शारीरिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह सच है कि वह अभी भी कोमा में हैं यह सच है।
लेकिन सूत्रों के अनुसार उन्हें वेंटिलेशन से हटा लिया गया है। और संयोग से आज ही भारत तथा पश्चिम बंगाल में निपा संक्रमण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि इस समय भारत में निपा संक्रमण को लेकर चिंता की कोई खास वजह नहीं है। इस संक्रमण के फैलने का जोखिम बहुत ही कम है इसलिए इस समय भारत में पर्यटन या व्यावसायिक यात्रा पर किसी तरह के प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं है ऐसा भी डब्ल्यूएचओ ने बताया है।
हालांकि डब्ल्यूएचओ ने अलग से पश्चिम बंगाल का नाम नहीं लिया, लेकिन अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि निपा संक्रमण को नियंत्रित करने में भारत ने एक बार फिर अपनी दक्षता और क्षमता साबित की है। पहले की तरह इस बार भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सभी जनस्वास्थ्य संबंधी उपायों का पालन किया गया है। अब तक मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण फैलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
शुक्रवार को अस्पताल से भी अच्छी खबर मिली। काफी हद तक स्वस्थ हो जाने के कारण आज संक्रमित पुरुष नर्स को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। हालांकि आने वाले कुछ हफ्तों तक उन्हें नियमित चेक-अप में रहना होगा। इसी सप्ताह 48 घंटे के अंतराल में दो बार उस नर्स (मूल रूप से पूर्व मेदिनीपुर के मयना निवासी) की निपा जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। तभी से डॉक्टर उनके डिस्चार्ज की योजना बना रहे थे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की अनुमति जरूरी थी।
गुरुवार को वह अनुमति मिलते ही पुरुष नर्स को छुट्टी दे दी गई। अब ध्यान वेंटिलेशन से बाहर आई पूर्व बर्धमान के कटोआ निवासी उस सिस्टर नर्स की शारीरिक स्थिति पर है। डॉक्टरों ने बताया कि निपा वायरस के हमले से उनके मस्तिष्क के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं, इसलिए पूरी तरह ठीक होने में कुछ समय लगना स्वाभाविक है।