बंगाल विधानसभा में फैले हंगामे के बीच लोकसभा में तृणमूल विभाजन की ओर बढ़ रही है। विद्रोही गुट की तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक संकट को और गहराते हुए लोकसभा अध्यक्ष से 20 सांसदों के अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया।
इस बारे में उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम 20 सांसदों ने मिलकर लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि हमारे बैठने के लिए अलग से व्यवस्था कर दी जाए। हम केंद्र और राज्य सरकार के साथ समन्वय रखते हुए पश्चिम बंगाल के विकास की दिशा में काम करेंगे।
सत्ता गंवाने की वजह से ही छोड़ा पार्टी सुप्रीमो का साथ?
काकोली घोष दस्तीदार ने आगे कहा कि हम पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ सालों से फैली अराजकता, कुशासन और बेरोजगारी के खिलाफ हैं। किसी जमाने में ममता बनर्जी की विश्वासपात्र रह चुकी काकोली घोष दस्तीदार का अब मानना है कि 'राष्ट्र हित' ने ही उन्हें अपनी पूर्व नेता के खिलाफ जाने को मजबूर कर दिया है।
उनका कहना है कि हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। मैं ममता बनर्जी के साथ 40 वर्षों से जुड़ी रही हूं। सांसद ने इस बात का पूरी तरह से खंडन किया कि बंगाल में तृणमूल की सत्ता न होने की वजह से उन्होंने पार्टी सुप्रीमो का साथ छोड़ा है।
उन्होंने कहा कि पिछले 3-4 वर्षों में सरकारी अधिकारियों पर इस बात का बहुत दबाव था कि वे कुछ खास नेताओं के कहे अनुसार ही काम करें। हम राज्य के विकास के लिए, राष्ट्र हित और देश की सुरक्षा के लिए काम करना चाहते हैं। इसलिए हम अलग होकर काम करना चाहते हैं।
#WATCH | Delhi: Lok Sabha MP Kakoli Ghosh says, "We will find out what happens later. For now, isn't it enough that we want to work for Bengal, for the country, and to keep India secure? This is a crucial issue. The issue of the nation is paramount to us..."
— ANI (@ANI) June 8, 2026
On being asked if pic.twitter.com/mENsQ9qKiv
आगे जो होगा देखा जाएगा
विद्रोही तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कि वह राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगी। उन्होंने कहा कि मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं...मैंने बहुत सह लिया। मैं यहां साल 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नहीं आयी। मैं पिछले 40 सालों से लड़ रही हूं। और जैसा मैंने पहले भी कहा है कि इन लोगों की बातों का मुझ पर कोई असर नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि तृणमूल से अलग होने का उनका फैसला पार्टी की वर्तमान स्थिति और पश्चिम बंगाल में शासन से जुड़ी समस्याओं को लेकर गहरी असंतोष से उत्पन्न हुआ है। आगे क्या होगा, यह बाद में देखा जाएगा। फिलहाल क्या यह काफी नहीं है कि हम बंगाल के लिए, देश के लिए और भारत को सुरक्षित रखने के लिए काम करना चाहते हैं? यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हमारे लिए राष्ट्र का मुद्दा ही सबसे आगे है।