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जूट उत्पादन में उछाल के संकेत, कच्चे माल की कमी से जूझ रहे उद्योग को मिल सकती है राहत

असम और बंगाल में बुवाई बढ़ी, अनुकूल मौसम से उत्पादन बढ़ने की संभावना, नीति फैसलों पर टिकी स्थिरता।

By श्वेता सिंह

Jun 08, 2026 18:52 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग को लंबे समय से जारी कच्चे माल की कमी से राहत मिलने की उम्मीद दिखाई दे रही है, क्योंकि 2026-27 में जूट की फसल बेहतर और जल्दी आने के संकेत मिल रहे हैं। शुरुआती बाजार आकलनों के अनुसार उत्पादन 95 से 100 लाख गांठ के बीच रह सकता है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले काफी अधिक है।

वर्ष 2025-26 में आधिकारिक रूप से जूट उत्पादन 75 लाख गांठ बताया गया था, हालांकि मिल स्रोतों का कहना है कि वास्तविक उपलब्धता इससे काफी कम रही, जिसके चलते उद्योग को उत्पादन कटौती और कई बार अस्थायी बंदी का सामना करना पड़ा।

जूट फसल में सुधार के संकेत

उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जूट की आधिकारिक उत्पादन संख्या घोषित नहीं की गई है। पूर्व भारतीय जूट मिल्स एसोसिएशन (IJMA) के अध्यक्ष संजय काजरिया ने कहा कि स्थिति संतुलन में है, जहां एक ओर मिलें कच्चे माल की कमी से जूझ रही हैं, वहीं दूसरी ओर नई फसल के बेहतर होने की उम्मीद बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्तों में सरकार और बाजार की नीतिगत प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि स्थिति स्थिर होती है या अस्थिर बनी रहती है।

उत्पादन में संभावित बढ़ोतरी

इधर कुछ किसानों ने बताया कि जूट की कटाई शुरू हो चुकी है और पौधों को प्रसंस्करण के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसमें पानी में भिगोकर रेटिंग प्रक्रिया के जरिए रेशे को अलग किया जाता है।

भारतीय जूट मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राघवेंद्र गुप्ता ने बताया कि 95 से 100 लाख गांठ का अनुमान अभी प्रारंभिक बाजार संकेतों पर आधारित है। संगठन की आधिकारिक रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रेडिंग 5 मई से बंद है और अगस्त 2026 के लिए केवल फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट हो रहे हैं।

बुवाई में बढ़ोतरी

व्यापार सूत्रों के अनुसार असम, उत्तर और दक्षिण बंगाल तथा बिहार के कुछ हिस्सों में इस वर्ष बुवाई क्षेत्र बढ़ा है, जिसका कारण शुरुआती समय में समर्थन मूल्य से तीन गुना अधिक कीमतें रही हैं। अनुकूल मौसम के चलते कई क्षेत्रों में फसल की स्थिति अच्छी बताई जा रही है।

कुछ इलाकों में फसल समय से पहले तैयार हो रही है, जिससे जून के अंत तक नई आपूर्ति आने की संभावना है, जबकि आधिकारिक जूट सीजन 1 जुलाई से शुरू होता है।

मिलों पर दबाव और कीमतों में उतार-चढ़ाव

वर्तमान में जूट मिलों को कच्चे माल की कमी, सीमित स्टॉक और आपूर्ति बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कीमतों में तेज वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हुआ है।

बाजार में अगस्त डिलीवरी के लिए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स में भी इस बेहतर फसल का असर दिख रहा है। अगस्त 10ः डिलीवरी लगभग 13,000 रुपये प्रति क्विंटल, अगस्त 20ः डिलीवरी 12,000 रुपये और अगस्त अंत के लिए लगभग 11,300 रुपये प्रति क्विंटल पर सौदे हो रहे हैं, जबकि मौजूदा अनौपचारिक हाजिर कीमत लगभग 19,000 रुपये प्रति क्विंटल है।

उद्योग की चिंताएं

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि फॉरवर्ड कीमतों में यह भारी अंतर इस उम्मीद को दर्शाता है कि नई फसल आने के बाद आपूर्ति स्थिति में सुधार होगा।

जूट उद्योग, जो पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा आधार है, वर्तमान में नीतिगत अनिश्चितताओं और स्टॉक प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि जूट कमिश्नर की ओर से स्पष्ट नीति दिशा-निर्देश मिलने तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

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