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RBI के संकेतों ने बढ़ाई चिंता, शेयर बाजार की चाल पड़ी धीमी

रेपो रेट स्थिर, जीडीपी अनुमान घटने से निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ा।

By श्वेता सिंह

Jun 06, 2026 18:48 IST

नई दिल्लीः विदेशी निवेशकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश का असर गुरुवार को शेयर बाजार पर ज्यादा देर तक नहीं दिखा। दिन की शुरुआत सकारात्मक रही, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ निवेशकों की सतर्कता हावी हो गई और बाजार अंत में लाल निशान में बंद हुआ। इसकी बड़ी वजह थी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती और ब्याज दरों को यथावत रखना।

बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक गिरकर 74,243.34 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 49.85 अंक फिसलकर 23,366.70 अंक पर आ गया। शुरुआती कारोबार में बाजार ने बढ़त दिखाई थी, लेकिन निवेशकों के कमजोर होते भरोसे के कारण यह टिक नहीं सकी।

दरअसल, सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) से जुड़े कर संबंधी मुद्दों को दूर करने के लिए अध्यादेश जारी किया है। बाजार को उम्मीद थी कि इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा और पूंजी प्रवाह में सुधार आएगा। इसी उम्मीद के चलते कारोबार की शुरुआत उत्साहपूर्ण रही, लेकिन बाद में निवेशकों का ध्यान आरबीआई की नीतिगत घोषणाओं पर केंद्रित हो गया।

आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। इस फैसले ने निवेशकों के बीच यह संदेश दिया कि आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार पहले के अनुमान से कुछ धीमी रह सकती है।

एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर का कहना है कि बाजार फिलहाल किसी मजबूत दिशा की तलाश में है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम सकारात्मक हैं, लेकिन विकास दर के अनुमान में कटौती ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यही कारण है कि बाजार में खरीदारी का उत्साह ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया।

उनके अनुसार, आरबीआई ने विदेशी निवेशकों के लिए कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने और बॉन्ड बाजार में कर संबंधी बाधाओं को कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इससे रुपये को समर्थन मिलने और विदेशी पूंजी आकर्षित होने की संभावना है। हालांकि आर्थिक विकास को लेकर जताई गई चिंता ने बाजार का मूड कमजोर कर दिया।

घरेलू कारणों के अलावा वैश्विक घटनाक्रमों का भी असर बाजार पर देखने को मिला। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत अभी मजबूत नहीं हैं। इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति प्रक्रिया को लेकर भी निवेशकों में उत्साह कम हुआ है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।

कमोडिटी बाजार में भी नरमी देखी गई। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत घटकर 94.64 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि कच्चा तेल 92.66 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा। सोने की कीमतों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि दिन की एक सकारात्मक खबर रुपये से जुड़ी रही। आरबीआई के विदेशी पूंजी को प्रोत्साहित करने वाले उपायों के बाद भारतीय मुद्रा मजबूत हुई और डॉलर के मुकाबले 95 रुपये के स्तर से नीचे पहुंच गई।

तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि बाजार फिलहाल सीमित दायरे में फंसा हुआ है। एसबीआई सिक्योरिटीज के तकनीकी एवं डेरिवेटिव अनुसंधान प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी पिछले कई कारोबारी सत्रों से एक सीमित दायरे में घूम रहा है। निचले स्तरों पर खरीदारी और ऊपरी स्तरों पर बिकवाली के कारण बाजार कोई स्पष्ट दिशा नहीं पकड़ पा रहा है। उन्होंने कहा कि निफ्टी अभी भी अपने महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों से नीचे कारोबार कर रहा है, जो निकट भविष्य में सतर्कता का संकेत देता है।

व्यापक बाजार में भी कमजोरी का असर दिखा। निफ्टी मिडकैप-100 सूचकांक में 0.35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 सूचकांक मामूली 0.06 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ।

बाजार की चौड़ाई भी बहुत मजबूत नहीं रही। निफ्टी-500 के 240 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई, जबकि 258 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशकों के बीच अभी भी भरोसे की कमी बनी हुई है और वे बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।

कुल मिलाकर, विदेशी निवेशकों को राहत देने वाले कदमों ने बाजार को शुरुआती सहारा तो दिया, लेकिन आर्थिक विकास की धीमी पड़ती रफ्तार और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर दिन के कारोबार पर साफ दिखाई दिया।

(समाचार एई समय कहीं भी निवेश करने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी निवेश में जोखिम होता है। निवेश से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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