राजद नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार लगातार लालू परिवार को निशाना बना रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शक्ति यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव ने अपनी पूरी सुरक्षा व्यवस्था छोड़ने का निर्णय लिया है और अब वह बिना सुरक्षा के ही जनता के बीच जाएंगे। उनके मुताबिक, जब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा कम कर दी गई तो तेजस्वी ने भी यही रास्ता अपनाने का फैसला किया।
दरअसल, हाल ही में बिहार सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली जेड प्लस सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया था। इसके बाद दोनों नेताओं ने अपने पटना स्थित आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया। इसी क्रम में तेजस्वी यादव ने भी अपनी सुरक्षा लौटाने का ऐलान कर दिया।
मामला केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। पटना के चर्चित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर भी विवाद जारी है। राज्य सरकार ने यह आवास मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है और राबड़ी देवी को इसे खाली करने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में पहले ही दूसरा सरकारी आवास उपलब्ध कराया जा चुका है।
राजद का आरोप है कि यह कार्रवाई नियमों से अधिक राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कई अन्य नेताओं को सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि लालू परिवार के मामले में अलग रवैया अपनाया जा रहा है।
वहीं, राबड़ी देवी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह आसानी से आवास खाली करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार चाहती है तो प्रशासनिक कार्रवाई कर सकती है, लेकिन वह स्वेच्छा से घर नहीं छोड़ेंगी। इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी आवास किसी व्यक्ति की स्थायी संपत्ति नहीं होता। उन्होंने कहा कि पद समाप्त होने के बाद सरकारी सुविधाओं और आवास को नियमों के अनुसार वापस कर देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं पद छोड़ने के बाद तय समय के भीतर सरकारी आवास खाली कर दिया था।
गौरतलब है कि 10 सर्कुलर रोड का बंगला लंबे समय से लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भी यही आवास सत्ता संचालन का मुख्य केंद्र था। अब इस आवास को लेकर शुरू हुआ विवाद बिहार की राजनीति में नया मुद्दा बन गया है।