भगवान श्रीराम भी 14 वर्षों का वनवास भोग कर वापस अपने घर अयोध्या लौट आए थे लेकिन 16 सालों का लंबा समय बीत जाने के बावजूद कोलकाता मेट्रो की पिंक लाइन (बरानगर से बैरकपुर) की समस्याओं का अंत ही नहीं हो रहा था। साल 2010 में अनुमोदन मिलने के बावजूद इस मेट्रो लाइन का काम आगे नहीं बढ़ा था।
संभावना जतायी जा रही है कि ऑरेंज लाइन की समस्या का समाधान होने के बाद अब पिंक लाइन मेट्रो पर पटरी पर लौटने वाली है। जानकारी के अनुसार इस मेट्रो कॉरिडोर को लेकर कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के साथ रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अधिकारियों ने बैठक भी की।
फिर से जगी उम्मीद की किरण
साल 2010 में बरानगर से बैरकपुर तक के लिए एलीवेटेड इस मेट्रो कॉरिडोर को अनुमोदन मिलने और DPR यानी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा होने के अलावा कोई काम नहीं हुआ था। एक प्रकार से यह कॉरिडोर ठंडे बस्ते में ही चला गया था।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद मात्र दो चरणों के 115 घंटे में ही चिंगरीघाटा में मेट्रो के ऑरेंज लाइन की समस्या का समाधान हुआ। बताया जाता है कि चिंगरीघाटा मेट्रो की समस्या दूर होते ही कोलकाता मेट्रो के पिंक लाइन को लेकर KMC के अधिकारियों के साथ RVNL के अधिकारियों ने बैठक की।
क्या थी समस्या?
बता दें, साल 2010 में जब कोलकाता मेट्रो के पिंक लाइन को अनुमोदित किया गया था तब रेल मंत्री के तौर पर बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कार्यरत थी। इसके ठीक अगले साल 2011 में बंगाल की सत्ता तृणमूल के हाथों में गयी। इसके बाद ही अचानक KMC के अधिकारियों को पता चला कि बी. टी. रोड के नीचे एक 60 इंच और एक 42 इंच व्यास का पाइपलाइन मौजूद है।
इन दोनों पाइप से होकर प्रतिदिन पलता वाटर ट्रिटमेंट से करीब 240 मीलियन गैलन पेयजल टाला टैंक में आता है। मेट्रो के काम की वजह से अगर इन दोनों पाइपलाइन को कोई नुकसान हुआ तो इससे उत्तर कोलकाता के लाखों लोगों को पेयजल नहीं मिलेगा। विकल्प के तौर पर एक 64 इंच व्यास का पाइप लगाने और पुरानी पाइप को हटाने का MoU पर रेल और KMC ने हस्ताक्षर किया था। साल 2012 में नई पाइप भी बिछायी गयी। लेकिन....
पिंक लाइन मेट्रो की विशेषताएं
रूट : बरानगर से बैरकपुर
लंबाई : 12.5 किलोमीटर
ट्रैक की संख्या : 2
रूट का प्रकार : एलिवेटेड
स्टेशनों की संख्या : 11
पिंक लाइन मेट्रो के प्रस्तावित स्टेशन :
- बरानगर
- कमरहट्टी
- आगरपाड़ा
- सोदपुर
- पानीहाटी
- सुखचर
- खड़दह
- टाटागेट
- टिटागढ़
- तालपुकुर
- बैरकपुर
कुल खर्च : करीब ₹2070 करोड़ (प्राथमिक रूप से)
सरकार से असहयोग के बावजूद रेलवे ने नहीं छोड़ी उम्मीद
इसके बाद ही तृणमूल दिल्ली की UPA सरकार से अलग हो गयी। रेलवे के अधिकारियों का आरोप है कि उसके बाद से ही राज्य सरकार इस मामले में असहयोग करने लगी। साल 2014 में नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री बनें उसके बाद KMC के अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से रेलवे को बता दिया कि बी.टी. रोड के नीचे से पाइपलाइन को हटाना संभव नहीं है।
इसके बाद ही लगभग ₹2070 करोड़ की परियोजना पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गयी। हालांकि भारतीय रेलवे ने इस कॉरिडोर को लेकर अपनी उम्मीदें नहीं छोड़ी। इस परियोजना को पूरी तरह से रद्द न करके रेलवे हर साल बजट में इस कॉरिडोर के खाते में कुछ आवंटन देकर इसे जिंदा रखती रही।
पिछले माह राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद रेल बोर्ड ने पिंक लाइन के बारे में फिर से सोच-विचार शुरू कर दिया। RVNL के अधिकारियों ने KMC के अधिकारियों के साथ बैठक की। बी. टी. रोड के नीचे से पेयजल की जो 5 पाइपलाइन गुजरी है, उनमें से कम से कम दो को हटाकर मेट्रो का पिलर लगाने का काम करना होगा।
कैसे इस काम को अंजाम दिया जाएगा, इस बारे में ही योजना बनाने के लिए यह बैठक की गयी। इंजीनियरों का मानना है कि 64 इंच की एक पाइपलाइन पहले ही बिछायी जा चुकी है, इसलिए यह काम थोड़ा आगे बढ़ चुका है। कुल मिलाकर पिंक लाइन मेट्रो के काम के आगे बढ़ने की उम्मीद तो जगी है लेकिन यह काम कब तक खत्म होगा, इस बारे में अभी तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।