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आदि गंगा संरक्षण हेतु जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान, कोलकाता की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का संकल्प

लोगों ने मिलकर ऐतिहासिक एवं प्राचीन जलधारा आदि गंगा, जो हुगली नदी की मूल धारा मानी जाती है, की स्वच्छता एवं संरक्षण के प्रति जनचेतना जागृत करने का संकल्प लिया।

By लखन भारती

Jun 06, 2026 11:57 IST

कोलकाता: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, भारत की नदियों के पुनर्जीवन एवं संरक्षण के लिए सामूहिक जनभागीदारी की भावना को सशक्त करते हुए श्री श्री रवि शंकर की प्रेरणा से आर्ट ऑफ लिविंग ने नमामि गंगे पहल, कोलकाता नगर निगम तथा पश्चिम बंगाल राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के सहयोग से कालीघाट मंदिर के समीप स्थित सदर घाट पर आदि गंगा के तटों पर एक विशाल जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया।

इस अभियान में आर्ट ऑफ लिविंग के सैकड़ों स्वयंसेवकों, युवाओं, स्थानीय नागरिकों तथा समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने मिलकर ऐतिहासिक एवं प्राचीन जलधारा आदि गंगा, जो हुगली नदी की मूल धारा मानी जाती है, की स्वच्छता एवं संरक्षण के प्रति जनचेतना जागृत करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर आदि गंगा के पर्यावरणीय, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए उसके पुनर्जीवन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

विश्वविख्यात आध्यात्मिक एवं मानवीय मूल्यों के अग्रदूत गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर कहते हैं, “नदियाँ समस्त सभ्यताओं की जीवनरेखा रही हैं। लोगों को पृथ्वी को पवित्र मानने, वृक्षों और नदियों को पवित्र मानने, मनुष्यों को पवित्र मानने तथा प्रकृति और प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का दर्शन करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।”

इस जनजागरण अभियान का शुभारंभ स्मिता पांडे, आयुक्त, कोलकाता नगर निगम द्वारा किया गया। उन्होंने नदियों के संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन के लिए व्यापक जनसहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, "आप सभी आज प्रातःकाल एक उद्देश्यपूर्ण भावना के साथ यहाँ आए हैं, और आदि गंगा के लिए जो कार्य आप कर रहे हैं, वह हम सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक कोलकाता निवासी के रूप में यह मेरे लिए भी बहुत मायने रखता है।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि आर्ट ऑफ लिविंग इस संकल्प में हमारे साथ जुड़ रहा है। निरंतर और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से हम आदि गंगा को ऐसे स्तर तक पुनर्जीवित कर सकते हैं, जहाँ लोग एक बार फिर नौका-विहार का आनंद ले सकें और इस ऐतिहासिक जलमार्ग से अपना जुड़ाव स्थापित कर सकें।"

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों ने नदी तट पर स्वच्छता अभियान चलाया तथा स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर जिम्मेदार कचरा प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और जलस्रोतों के संरक्षण हेतु निरंतर नागरिक सहभागिता के महत्व के प्रति जागरूकता फैलायी।

इस अवसर पर नदी संरक्षण हेतु एक सार्वजनिक संकल्प भी दिलाया गया, जिसमें नागरिकों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा नदियों एवं सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

आर्ट ऑफ लिविंग के ट्रस्टी श्री संदीप नवलखा ने कहा, “आध्यात्मिकता और स्वच्छता एक-दूसरे के पूरक हैं। कोलकाता की पावन आदि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी विरासत, हमारी आस्था और हमारे इतिहास की जीवंत धारा है। आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे स्वच्छ और संरक्षित रखना हमारा दायित्व है। आज जिस उत्साह और संख्या में लोग इस अभियान से जुड़े हैं, वह इस बात का प्रमाण है कि अधिकाधिक नागरिक इस पवित्र सेवा-कार्य का हिस्सा बनने के लिए तत्पर हैं।”

यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के मध्य गहरे संबंध को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आदि गंगा के समक्ष उपस्थित चुनौतियों तथा उसके पुनरुद्धार में नागरिकों की भूमिका के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न करने का प्रयास है।

यह अभियान 7 जून तक दैनिक स्वच्छता एवं जागरूकता गतिविधियों के साथ निरंतर जारी रहेगा। आगामी दो दिनों तक घाट पर सांध्यकालीन भजन-कीर्तन सत्र निर्धारित हैं, तथा समापन दिवस पर 'आदि गंगा पूजा' और 'आरती' के साथ इस अभियान की पूर्णाहूति होगी।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित अन्य गतिविधियों के अंतर्गत आर्ट ऑफ लिविंग ने जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के साथ मिलकर एक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया, जिसमें 800 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों में लोगों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। आशा है कि ये पहलें पर्यावरण संरक्षण तथा आदि गंगा के पुनर्जीवन हेतु समुदाय-आधारित प्रयासों को और अधिक गति एवं सशक्त समर्थन प्रदान करेंगी।

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