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भारत-रूस संबंधों पर पुतिन का बड़ा बयान, कहा- दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी किसी तीसरे देश के दबाव से नहीं होगी कमजोर

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारत की संप्रभुता पर जताया भरोसा, बोले- नई दिल्ली हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही लेती है फैसले।

By रजनीश प्रसाद

Jun 06, 2026 13:11 IST

मॉस्को : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच भारत का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है और उसका इतिहास कभी भी किसी विदेशी शक्ति के निर्देशों पर चलने का नहीं रहा है। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाकर भारत-रूस संबंधों को कमजोर करने की कोशिश सफल नहीं होगी।

सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (SPIEF) में अपने संबोधन के दौरान पुतिन ने कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को चुनौती नहीं दी जा सकती। रूसी मीडिया से बातचीत में उन्होंने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि नई दिल्ली हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और किसी बाहरी दबाव में फैसले नहीं लेती।

पुतिन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन पिछले कई महीनों से रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर लगातार दबाव बना रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते भारत रूस के तेल का प्रमुख खरीदार बनकर उभरा है। वाशिंगटन का तर्क है कि रूसी तेल की खरीद से मॉस्को की युद्ध अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष मदद मिल रही है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार पुतिन के इस बयान को ट्रंप प्रशासन के लिए सीधा संदेश मान रहे हैं। पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के संबंध कई दशकों पुराने हैं और किसी तीसरे देश के दबाव से इनमें बदलाव नहीं आएगा।

रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालकर भारत को रूस से दूर करने की कोशिश पूरी तरह निरर्थक है। उनके अनुसार दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, रणनीतिक सहयोग और लंबे समय से चली आ रही मित्रता पर आधारित हैं।

पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बढ़ते रिश्तों को रूस किसी खतरे के रूप में नहीं देखता। उनका मानना है कि भारत अपनी बहुआयामी कूटनीति को बनाए रखते हुए रूस के साथ भी मजबूत साझेदारी जारी रखेगा।

ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भारत पहले ही साफ कर चुका है कि राष्ट्रीय हित उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने हाल ही में कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट मिले या नहीं, तेल खरीदने का फैसला देश के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के रूप में भारत सस्ते रूसी तेल का लाभ पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहता जबकि ट्रंप प्रशासन रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है। ऐसे माहौल में पुतिन का बयान भारत के प्रति रूस के कूटनीतिक समर्थन का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

पुतिन के वक्तव्य से दो प्रमुख बातें सामने आई हैं। पहली रूस आज भी भारत को अपना महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। दूसरी मॉस्को को पूरा भरोसा है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र फैसले लेना जारी रखेगी।

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