नई दिल्ली : सतत समुद्री प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करने जा रहा है। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी की टीम सी शक्ति प्रतिष्ठित मोनाको एनर्जी बोट चैलेंज 2026 में भारत की एकमात्र प्रतिनिधि टीम के रूप में हिस्सा लेगी। यह प्रतियोगिता 8 से 11 जुलाई के बीच मोनाको में आयोजित की जाएगी।
यॉट क्लब डी मोनाको द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता स्वच्छ समुद्री प्रणोदन (क्लीन मरीन प्रोपल्शन) तकनीकों के लिए दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में से एक मानी जाती है। इस वर्ष प्रतियोगिता में 22 देशों की 56 टीमें भाग लेंगी। इस आयोजन में छात्र, इंजीनियर, शोधकर्ता, निर्माता और शिपयार्ड से जुड़े विशेषज्ञ एक साथ आते हैं और समुद्री उद्योग को टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अपने नवाचारों का प्रदर्शन करते हैं।
एनर्जी क्लास में उतरेगी भारत की पहली और एकमात्र टीम
टीम सी शक्ति प्रतियोगिता की सबसे चुनौतीपूर्ण श्रेणियों में से एक ‘एनर्जी क्लास’ में भाग ले रही है। यह मोनाको एनर्जी बोट चैलेंज में हिस्सा लेने वाली भारत की पहली और एकमात्र टीम है।
वर्ष 2022 में गठित इस टीम ने एक इलेक्ट्रिक कैटामरैन विकसित किया है। टीम वर्तमान में अपने स्वयं के डिजाइन किए गए प्रोपल्शन सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने पर काम कर रही है। इसके साथ ही नौका की कंपोजिट संरचना में जैव-आधारित फाइबर (बायो-बेस्ड फाइबर्स) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उसकी मजबूती, कार्यक्षमता और पर्यावरणीय स्थिरता को बेहतर बनाया जा सके।
एशियाई देशों की बढ़ती भागीदारी बनी आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष की प्रतियोगिता में भारत और चीन जैसे एशियाई देशों की बढ़ती भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसे हरित समुद्री प्रौद्योगिकियों के प्रति वैश्विक रुचि और प्रतिबद्धता का संकेत माना जा रहा है।
आयोजकों ने टीम सी शक्ति को उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले उन युवा नवोन्मेषकों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है, जो टिकाऊ समुद्री गतिशीलता के भविष्य को आकार देने में योगदान दे रहे हैं।
एनर्जी क्लास में होती है अत्याधुनिक तकनीकों की परीक्षा
प्रतियोगिता की प्रमुख श्रेणी मानी जाने वाली एनर्जी क्लास को उन्नत इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड प्रोपल्शन तकनीकों की वास्तविक परीक्षा का मंच माना जाता है।
इस श्रेणी में सभी टीमों को मानकीकृत हुल (नौका ढांचा) उपलब्ध कराया जाता है, जिससे निर्णायक ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली, प्रोपल्शन आर्किटेक्चर और तकनीकी नवाचारों की कार्यक्षमता का समान परिस्थितियों में मूल्यांकन कर सकें।
वैश्विक संस्थानों और उद्योग जगत का समर्थन
‘मोनाको, कैपिटल ऑफ एडवांस्ड यॉटिंग’ पहल के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता को प्रिंस अल्बर्ट द्वितीय ऑफ मोनाको फाउंडेशन, यूबीएस, बीएमडब्ल्यू और एसबीएम ऑफशोर का समर्थन प्राप्त है।
इसके अलावा इस आयोजन में सेफ हार्बर, ओशियानको, फेरेटी ग्रुप, अजिमुत-बेनेटी ग्रुप और लुर्सेन जैसे समुद्री उद्योग के प्रमुख खिलाड़ी भी भाग लेते हैं।
यॉट क्लब डी मोनाको के निदेशक और महासचिव बर्नार्ड डी'अलेसांद्री ने कहा-“मोनाको एनर्जी बोट चैलेंज विचारों को वास्तविकता में बदलने का अवसर प्रदान करता है। यहां टीमें वास्तविक परिस्थितियों में तकनीकों का परीक्षण कर सकती हैं, उद्योग के विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान कर सकती हैं और अपने अनुभव साझा कर सकती हैं। यही व्यावहारिक दृष्टिकोण इस आयोजन को विशेष बनाता है।”
वहीं, सेफ हार्बर में यूरोप बिजनेस डेवलपमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष टेंगुई डुक्रोस ने कहा-“यॉट क्लब डी मोनाको के साथ मिलकर हम यॉटिंग उद्योग के लिए अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
भारत की इंजीनियरिंग क्षमता को मिलेगा वैश्विक मंच
भारत के लिए टीम सी शक्ति की भागीदारी केवल तकनीकी उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि यह देश की इंजीनियरिंग प्रतिभा और पर्यावरण-अनुकूल समुद्री समाधान विकसित करने की प्रतिबद्धता की भी पहचान है।
जब दुनिया स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन प्रणालियों की ओर तेजी से बढ़ रही है, तब भारतीय युवा नवोन्मेषकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वदेशी डिजाइन, अनुसंधान और इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा।
2014 से वैश्विक नवाचार का केंद्र बना मोनाको एनर्जी बोट चैलेंज
वर्ष 2014 में शुरू हुई यह प्रतियोगिता समय के साथ स्वच्छ समुद्री नवाचारों के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित हो चुकी है। पिछले 12 संस्करणों में 50 विश्वविद्यालयों और 35 राष्ट्रीयताओं से जुड़े 6,500 से अधिक छात्र इसमें भाग ले चुके हैं।
इसी वजह से मोनाको एनर्जी बोट चैलेंज आज सतत यॉटिंग और पर्यावरण-अनुकूल समुद्री परिवहन को बढ़ावा देने वाले दुनिया के सबसे प्रभावशाली आयोजनों में शामिल किया जाता है।